डायबिटीज मरीजों को बड़ी राहत: भारत में लॉन्च हुई हफ्ते में सिर्फ 1 बार लगने वाली दुनिया की पहली इंसुलिन ‘Awiqli’, रोज के झंझट से मुक्ति

नई दिल्ली, 9 जुलाई 2026: भारत के करोड़ों डायबिटीज (मधुमेह) रोगियों के लिए चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र से एक बेहद क्रांतिकारी और राहत देने वाली खबर सामने आई है। मशहूर डैनिश दवा निर्माता कंपनी नोवो नॉर्डिस्क (Novo Nordisk) ने भारतीय बाजार में दुनिया की पहली साप्ताहिक बेसल इंसुलिन ‘Awiqli’ (इंसुलिन आइकोडेक / Insulin Icodec) को आधिकारिक तौर पर लॉन्च कर दिया है।

इस नई दवा के आने से अब मरीजों को रोज-रोज सुई चुभाने के दर्द और मानसिक तनाव से हमेशा के लिए आजादी मिल जाएगी।

1. सालाना 313 इंजेक्शन की बचत: अब साल में केवल 52 डोज

यह दुनिया की पहली ऐसी बेसल इंसुलिन है जिसे सप्ताह में सिर्फ एक बार लगाने की जरूरत होती है। वर्तमान में डायबिटीज मरीजों को साल भर में लगभग 365 इंजेक्शन लगाने पड़ते हैं, लेकिन ‘Awiqli’ के इस्तेमाल से अब साल में सिर्फ 52 इंजेक्शन ही लगाने होंगे। यानी सीधे तौर पर सालाना 313 इंजेक्शंस की बचत होगी।

  • किन्हें दी जा सकती है: यह दवा टाइप-1 और टाइप-2 डायबिटीज से पीड़ित वयस्क (Adult) मरीजों के इलाज के लिए स्वीकृत की गई है।

  • लगाने में आसान: इसे कंपनी द्वारा तैयार किए गए एक विशेष FlexTouch पेन डिवाइस के जरिए बेहद आसानी से त्वचा के नीचे इंजेक्ट किया जा सकता है।

2. कीमत का गणित: मौजूदा इंसुलिन से 40% तक किफायती

इस नई साप्ताहिक इंसुलिन की सबसे बड़ी खासियत इसकी जेब पर हल्की पड़ने वाली कीमत है। कंपनी ने इसे भारतीय मरीजों की पहुंच को ध्यान में रखकर बेहद प्रतिस्पर्धी दाम पर उतारा है:

  • पैक की कीमत: इसके 700 यूनिट के पैक की कीमत ₹2,611 तय की गई है।

  • प्रति यूनिट लागत: इसकी कीमत मात्र ₹3.73 प्रति यूनिट पड़ती है, जो बाजार में उपलब्ध रोज लगाने वाली अन्य बेसल इंसुलिन की तुलना में 30 से 40 प्रतिशत तक सस्ती है।

  • खर्च का उदाहरण: यदि किसी मरीज को डॉक्टर ने रोजाना 10 यूनिट इंसुलिन की सलाह दी है, तो हफ्ते में कुल 70 यूनिट के हिसाब से उसका साप्ताहिक खर्च मात्र ₹261 के आसपास आएगा।

3. ट्रायल में सामने आए शानदार परिणाम: अधिक सुरक्षित और प्रभावी

ग्लोबल ‘ONWARDS-1’ क्लिनिकल प्रोग्राम के तहत किए गए कड़े ट्रायल्स में इस साप्ताहिक इंसुलिन के परिणाम रोजाना दी जाने वाली पारंपरिक इंसुलिन (जैसे ग्लार्जिन U100) से बेहतर पाए गए हैं:

  • बेहतर शुगर कंट्रोल: इसने मरीजों के HbA1c (3 महीने की औसत शुगर) के स्तर को तेजी से कम करने और ब्लड शुगर को पूरे दिन तय दायरे (Time-in-Range) में बनाए रखने में अधिक सफलता दिखाई है।

  • हाइपोग्लाइसीमिया का कम खतरा: क्लिनिकल परीक्षणों में टाइप-2 डायबिटीज के अधिकांश मरीज बिना शुगर लेवल को खतरनाक रूप से कम किए (Hypoglycemia के बिना) अपने टारगेट शुगर लेवल को हासिल करने में सफल रहे।

4. इंसुलिन शुरू करने का डर और देरी होगी खत्म

भारत के प्रमुख चिकित्सा विशेषज्ञों (मुंबई के डॉ. राजीव कोविल और दिल्ली के डॉ. एस.के. वांगनू) के अनुसार, भारत में मरीज रोज सुई चुभाने के डर और यात्रा के दौरान इंसुलिन कैरी करने के झंझट के कारण इंसुलिन थेरेपी शुरू करने में 7 से 9 साल की देरी कर देते हैं। इस देरी से शरीर के अन्य अंगों (किडनी, आंखें और दिल) को भारी नुकसान पहुंचता है। अब हफ्ते में सिर्फ एक बार डोज होने से मरीजों की हिचक दूर होगी और इलाज समय पर शुरू हो सकेगा।

भारत में डायबिटीज का डरावना आंकड़ा

एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत में वर्तमान में करीब 10.1 करोड़ लोग डायबिटीज से पीड़ित हैं, जबकि 13.6 करोड़ लोग प्री-डायबिटीज (बॉर्डरलाइन) की स्थिति में हैं। देश में लगभग 60 लाख लोग अभी इंसुलिन ले रहे हैं, जबकि असल में इससे दोगुने लोगों को इसकी सख्त जरूरत है।

डॉक्टरों की सलाह: सिर्फ दवा नहीं, लाइफस्टाइल भी बदलें

विशेषज्ञों ने दवा के साथ-साथ अपनी दैनिक दिनचर्या में इन आदतों को शामिल करने पर जोर दिया है:

  1. सप्ताह में कम से कम 150 मिनट मध्यम एक्सरसाइज जैसे तेज चलना, वॉक या योग जरूर करें।

  2. ऑफिस या घर में काम के दौरान हर 30-60 मिनट में अपनी सीट से उठकर थोड़ा टहलें, लगातार बैठने से बचें।

  3. प्रतिदिन 7 से 9 घंटे की गहरी और सुकाूनभरी नींद लें तथा तनाव को दूर करने के लिए ध्यान (Meditation) लगाएं।