छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: नार्को और पॉलीग्राफ टेस्ट के लिए आरोपी की सहमति अनिवार्य, पुलिस को दी कड़ी हिदायत
बिलासपुर, 3 जुलाई 2026: छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने नागरिक अधिकारों और पुलिस जांच के तौर-तरीकों को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। बिलासपुर हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की डिवीजन बेंच ने स्पष्ट किया है कि कोई भी जांच एजेंसी किसी भी आरोपी या संदिग्ध की इच्छा के विरुद्ध उसका वैज्ञानिक परीक्षण नहीं कर सकती।
हाई कोर्ट ने अपने आदेश में साफ कहा है कि पुलिस किसी भी व्यक्ति को उसकी लिखित सहमति के बिना नार्को (Narco), पॉलीग्राफ (Polygraph) या ब्रेन मैपिंग (Brain Mapping) जैसे टेस्ट के लिए मजबूर नहीं कर सकती।
18 दिनों तक थाने बुलाने पर कोर्ट नाराज
इस मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। याचिकाकर्ताओं को लगातार 18 दिनों तक थाने बुलाकर प्रताड़ित करने और मानसिक रूप से परेशान करने के मामले पर हाई कोर्ट ने सख्त नाराजगी व्यक्त की। कोर्ट ने इस तरह के रवैये को मानवाधिकारों और नागरिक स्वतंत्रता का उल्लंघन माना है।
जांच एजेंसियों को मिली कड़ी हिदायत
चीफ जस्टिस की बेंच ने पुलिस प्रशासन और जांच एजेंसियों को कड़ी हिदायत देते हुए कहा है कि जांच के नाम पर किसी भी नागरिक को बिना वजह प्रताड़ित न किया जाए। इस फैसले के बाद अब पुलिस को किसी भी हाई-प्रोफाइल या सामान्य मामले में वैज्ञानिक टेस्ट कराने से पहले कानूनी रूप से संबंधित व्यक्ति की स्पष्ट सहमति लेनी होगी, जिससे मनमानी जांच पर रोक लगेगी।
