राम मंदिर चोरी मामले में बड़ा खुलासा: आरोपी अविनाश के घर से ‘रामराज्य कोष’ का संदूक और 20 लाख रुपये बरामद; SIT को मिला 15 दिन का अतिरिक्त समय
अयोध्या, 02 जुलाई 2026। अयोध्या के भव्य राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी के मामले में जांच एजेंसियों को एक बहुत बड़ी कामयाबी हाथ लगी है। इस हाई-प्रोफाइल मामले की तफ्तीश कर रही पुलिस और विशेष जांच दल (SIT) ने मुख्य आरोपी अविनाश के ठिकाने पर छापेमारी कर भारी मात्रा में नकदी और महत्वपूर्ण सबूत बरामद किए हैं।
पुलिस सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, आरोपी अविनाश के घर से ‘रामराज्य कोष’ लिखा हुआ एक संदूक और लगभग 20 लाख रुपये की नगद राशि बरामद की गई है। माना जा रहा है कि यह रकम मंदिर के दानपात्र और चढ़ावे से चुराई गई राशि का एक बड़ा हिस्सा है।
चोरी के पैसे से संपत्ति खरीदने की थी फिराक
शुरुआती जांच में सामने आया है कि आरोपी अविनाश लंबे समय से मंदिर के चढ़ावे की राशि पर नजर रखे हुए था। बरामद किए गए ‘रामराज्य कोष’ के संदूक से यह स्पष्ट होता है कि चोरी को बेहद शातिराना और योजनाबद्ध तरीके से अंजाम दिया गया था। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि क्या इस साजिश में मंदिर प्रबंधन या सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ा कोई अन्य बाहरी या आंतरिक व्यक्ति भी शामिल था।
चोरी मामले का अब तक का अपडेट (Table)
इस संवेदनशील मामले की संजीदगी को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह सख्त रुख अपनाए हुए है। मामले से जुड़े मुख्य तथ्य नीचे दी गई तालिका में देखे जा सकते हैं:
| मुख्य बिंदु | विवरण और वर्तमान स्थिति |
| मुख्य आरोपी | अविनाश (हिरासत में, पूछताछ जारी) |
| बरामदगी | ₹20 लाख नगद और ‘रामराज्य कोष’ लिखा संदूक |
| जांच एजेंसी | स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) |
| SIT की नई समय-सीमा | जांच की अवधि 15 दिन के लिए और बढ़ाई गई |
जांच के लिए SIT की अवधि 15 दिन और बढ़ी
“यह मामला सीधे तौर पर करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था और मंदिर की सुरक्षा से जुड़ा हुआ है। मामले की तह तक जाने और पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश करने के लिए SIT की जांच अवधि को 15 दिनों के लिए और बढ़ा दिया गया है। किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।”
— वरिष्ठ पुलिस अधिकारी, अयोध्या
बरामद की गई रकम और संदूक को कोर्ट के समक्ष साक्ष्य के रूप में पेश करने की तैयारी की जा रही है। वहीं, इस घटना के बाद राम जन्मभूमि परिसर और दान काउंटर की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की जा रही है ताकि भविष्य में ऐसी चूक दोबारा न हो।
