CG Cabinet Decisions: साय कैबिनेट के 3 ऐतिहासिक फैसले; अब मिलेगा 125 दिन का गारंटी रोजगार, नई बायोगैस नीति और ‘अटल आजीविका हाट’ को मंजूरी
रायपुर: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में आज मंत्रालय (महानदी भवन) में साय कैबिनेट की एक बेहद महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हुई। इस बैठक में राज्य के ग्रामीण विकास, रोजगार सृजन और पर्यावरण संरक्षण को लेकर तीन बड़े और ऐतिहासिक निर्णयों पर मुहर लगाई गई है। सरकार ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए दो नई योजनाओं और एक नई दूरगामी नीति के प्रारूप को मंजूरी दी है।
कैबिनेट बैठक में लिए गए 3 मुख्य निर्णय इस प्रकार हैं:
1. ‘वीबी-जी राम जी’ योजना को मंजूरी: अब मिलेगा 125 दिन का गारंटी रोजगार
मंत्रिपरिषद ने ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और डिजिटल सुशासन को बढ़ावा देने के लिए ’’विकसित भारत – रोजगार और आजीविका के लिये गारंटी मिशन (ग्रामीण) : वीबी-जी राम जी योजना छत्तीसगढ़’’ के प्रारूप का अनुमोदन किया है।
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125 दिन के रोजगार की गारंटी: भारत सरकार के अधिनियम, 2025 के अनुरूप लागू की जा रही इस योजना के तहत पात्र ग्रामीण परिवारों को हर वित्तीय वर्ष में 125 दिनों के अकुशल श्रम आधारित रोजगार की वैधानिक गारंटी मिलेगी।
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बजट और खर्च: इस योजना में केंद्र और राज्य का व्यय अनुपात 60:40 रहेगा। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए राज्य के बजट में 4,000 करोड़ रुपये का बड़ा प्रावधान किया गया है।
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क्या होंगे काम: इसके तहत जल संरक्षण, ग्रामीण आधारभूत संरचना निर्माण और पीएम गति शक्ति से समन्वय कर ग्रामीण क्षेत्रों में टिकाऊ संपत्तियों का विकास किया जाएगा।
2. शुरू होगी ’’अटल आजीविका समृद्धि हाट’’ योजना
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने और स्थानीय स्तर पर स्वरोजगार के नए अवसर पैदा करने के लिए कैबिनेट ने इस योजना को हरी झंडी दी है।
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नोडल एजेंसी: छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन को इसकी नोडल एजेंसी और पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग को नोडल विभाग बनाया गया है।
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क्या खुलेगा: इसके तहत ग्रामीण क्षेत्रों में हथकरघा, बुनाई-सिलाई के ‘सृजन केंद्र’, दलहन-तिलहन व डेयरी की ‘प्रसंस्करण इकाइयां’ और कोल्ड स्टोरेज, सोलर ड्रायर व अटल डिजिटल केंद्र जैसे ‘सेवा केंद्र’ स्थापित किए जाएंगे। इससे ग्रामीण उत्पादों को बेहतर बाजार और युवाओं को अपने ही क्षेत्र में रोजगार मिलेगा।
3. छत्तीसगढ़ कम्प्रेस्ड बायोगैस नीति (CG-CBG Policy), 2026 को हरी झंडी
राज्य में कचरा प्रबंधन और ग्रीन एनर्जी को बढ़ावा देने के लिए कैबिनेट ने इस नीति के प्रारूप का अनुमोदन किया है।
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कचरे से बनेगी गैस: इस नीति के जरिए कृषि अवशेष, शहरी ठोस अपशिष्ट (कचरा) और मवेशियों के अपशिष्ट का वैज्ञानिक प्रबंधन कर कम्प्रेस्ड बायोगैस (CBG) बनाई जाएगी।
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5 लाख टन का लक्ष्य: ‘छत्तीसगढ़ अंजोर विजन 2047’ के अनुसार राज्य में हर साल लगभग 5 लाख टन CBG उत्पादन की संभावना है।
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नोडल एजेंसी: छत्तीसगढ़ बायोफ्यूल विकास प्राधिकरण (CBDA) को इसकी राज्य नोडल एजेंसी बनाया गया है और ऊर्जा विभाग इसे संचालित करेगा।
