बंगाल की राजनीति में महाभूकंप: ममता बनर्जी की हार के बाद TMC में बड़ी बगावत; 19 लोकसभा सांसदों ने स्पीकर को भेजा पत्र, 4 राज्यसभा सांसदों का इस्तीफा

कोलकाता/नई दिल्ली, 12 जून 2026।

पश्चिम बंगाल की राजनीति से इस वक्त की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। हाल ही में संपन्न हुए चुनावों में मिली करारी हार के बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (TMC) में अब तक की सबसे बड़ी बगावत हो गई है। पार्टी के भीतर असंतोष की चिंगारी अब एक बड़ी टूट का रूप ले चुकी है।

चुनावों में मिली हार के महज 14 दिन बाद ही पार्टी के बागी सांसदों का एक गुप्त पत्र सामने आया है, जिसने राजनीतिक गलियारों में खलबली मचा दी है।

19 लोकसभा सांसदों के दस्तखत, स्पीकर को भेजा पत्र

प्राप्त जानकारी के अनुसार, टीएमसी के बागी गुट ने सीधे तौर पर पार्टी नेतृत्व को चुनौती दे दी है। बताया जा रहा है कि 18 मई को ही लोकसभा स्पीकर (Lok Sabha Speaker) को एक आधिकारिक पत्र भेजा गया था, जिस पर टीएमसी के 19 लोकसभा सांसदों के हस्ताक्षर हैं। इस पत्र के सामने आने के बाद से यह साफ हो गया है कि संसद के भीतर ममता बनर्जी का कुनबा पूरी तरह से बिखरने की कगार पर पहुंच गया है।


राज्यसभा से भी 4 सांसदों ने दिया इस्तीफा

लोकसभा में लगी इस बड़ी सेंधमारी के साथ ही टीएमसी को राज्यसभा में भी करारा झटका लगा है। पार्टी के 4 वरिष्ठ राज्यसभा सांसदों ने भी अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है। एक साथ इतनी बड़ी संख्या में सांसदों की बगावत और इस्तीफे ने ममता बनर्जी के नेतृत्व और तृणमूल कांग्रेस के भविष्य पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

बगावत की मुख्य वजहें क्या हैं?

  • चुनावी हार की जिम्मेदारी: पार्टी सूत्रों के मुताबिक, हालिया चुनावों में पार्टी की करारी शिकस्त के बाद से ही सांसदों और जमीनी नेताओं में शीर्ष नेतृत्व के फैसलों को लेकर भारी नाराजगी थी।

  • पार्टी के भीतर संवादहीनता: बागी सांसदों का आरोप है कि पार्टी में केवल चुनिंदा लोगों की ही सुनी जा रही थी, जिससे वरिष्ठ नेताओं की अनदेखी हुई।

इस बड़ी बगावत के बाद फिलहाल तृणमूल कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह बागी गुट अलग दल बनाता है या किसी अन्य दल को समर्थन देता है, तो बंगाल से लेकर दिल्ली तक की राजनीति की तस्वीरें पूरी तरह बदल जाएंगी।