माता कौशल्या महोत्सव 2026 का भव्य शुभारंभ : चंद्रखुरी धाम में श्रद्धा और संस्कृति की झलक

रायपुर। ग्राम चंद्रखुरी (जिला रायपुर) स्थित पावन माता कौशल्या धाम में माता कौशल्या महोत्सव 2026 का भव्य और गरिमामय शुभारंभ हुआ। दो दिवसीय इस महोत्सव के प्रथम दिवस पर श्रद्धा, भक्ति और छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक-सांस्कृतिक परंपराओं का अद्भुत संगम देखने को मिला, जिससे पूरा मंदिर परिसर भक्तिमय वातावरण में सराबोर हो उठा। महोत्सव के पहले दिन दोपहर 3 बजे मानस मंडलियों की भावपूर्ण प्रस्तुतियों के साथ कार्यक्रम की शुरुआत हुई, जहां तीन प्रमुख मंडलियों ने अपनी मधुर वाणी से श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया। सायं 6 बजे अतिथियों ने माता कौशल्या के दर्शन, पूजन एवं आरती कर प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना की तथा इसके पश्चात विभागीय प्रदर्शनी का अवलोकन करते हुए शासन की योजनाओं और उपलब्धियों की जानकारी प्राप्त की। कार्यक्रम दीप प्रज्ज्वलन, माल्यार्पण एवं राजगीत के साथ प्रारंभ हुआ, मुख्य अतिथि के रूप में मंत्री श्री गुरु खुशवंत साहेब तथा अध्यक्षता सुश्री मोना सेन ने की। संस्कृति विभाग के संचालक श्री विवेक आचार्य ने स्वागत उद्बोधन देते हुए विभागीय गतिविधियों का प्रतिवेदन प्रस्तुत किया, वहीं अतिथियों ने अपने संबोधन में माता कौशल्या की महिमा, छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत तथा लोक परंपराओं के संरक्षण की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। रात्रि 8 बजे ‘रंग छत्तीसा’ कार्यक्रम के अंतर्गत श्रीमती पूनम विराट तिवारी एवं छत्तीसगढ़ी लोक कला मंच द्वारा प्रस्तुत आकर्षक सांस्कृतिक कार्यक्रम ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया और देर रात तक तालियों की गूंज बनी रही।
चंद्रखुरी स्थित माता कौशल्या धाम देशभर में अपनी विशिष्ट पहचान रखता है। यह स्थान भगवान श्रीराम की माता कौशल्या का जन्मस्थान माना जाता है, जिसके कारण इसकी धार्मिक महत्ता अत्यंत बढ़ जाती है। मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह एक विशाल सरोवर के मध्य द्वीप के रूप में स्थित है, जहां तक सुंदर पुल के माध्यम से पहुंचा जाता है। जल से घिरा शांत वातावरण, भव्य मंदिर संरचना और आध्यात्मिक ऊर्जा इसे एक अनूठा तीर्थस्थल बनाते हैं, जो श्रद्धालुओं के साथ-साथ पर्यटकों को भी आकर्षित करता है।
राज्य सरकार द्वारा माता कौशल्या धाम को राष्ट्रीय स्तर के धार्मिक एवं पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए निरंतर कार्य किए जा रहे हैं। मंदिर परिसर का समग्र विकास, भव्य सौंदर्यीकरण, आकर्षक लैंडस्केपिंग, आधुनिक प्रकाश व्यवस्था तथा पर्यटकों के लिए मूलभूत सुविधाओं जैसे पेयजल, शौचालय, विश्राम स्थल एवं पार्किंग की बेहतर व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। इसके साथ ही रायपुर से चंद्रखुरी तक सड़क मार्ग को सुगम एवं सुदृढ़ बनाया गया है, जिससे यहां पहुंचना आसान हो गया है। सांस्कृतिक आयोजनों के लिए बेहतर व्यवस्थाएं की गई हैं, जिससे इस प्रकार के भव्य कार्यक्रमों का आयोजन निरंतर संभव हो पा रहा है। स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है, जिससे यह स्थल एक आदर्श धार्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में उभर रहा है।
माता कौशल्या महोत्सव न केवल एक धार्मिक आयोजन है, बल्कि यह छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोकसंस्कृति, परंपरा और पहचान को सशक्त करने वाला महत्वपूर्ण मंच भी है। ऐसे आयोजनों के माध्यम से जहां एक ओर श्रद्धालुओं की आस्था को मजबूती मिलती है, वहीं दूसरी ओर स्थानीय कलाकारों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर प्राप्त होता है। मुख्य अतिथि श्री गुरु खुशवंत साहेब ने अपने संबोधन में कहा कि इस प्रकार के आयोजन प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
माता कौशल्या महोत्सव 2026 न केवल आस्था और भक्ति का प्रतीक बनकर उभरा है, बल्कि राज्य सरकार की सांस्कृतिक संरक्षण और पर्यटन विकास के प्रति प्रतिबद्धता का भी सशक्त उदाहरण प्रस्तुत कर रहा है, जिससे चंद्रखुरी धाम आज छत्तीसगढ़ की नई पहचान के रूप में स्थापित हो रहा है।