ईरान जंग का असर: सेंसेक्स 2,100 अंक टूटा, वैश्विक बाजारों में हाहाकार; कच्चा तेल 60% उछला

रायपुर। मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव और ईरान से जुड़ी जंग की आशंकाओं ने वैश्विक शेयर बाजारों में भारी उथल-पुथल मचा दी है। भारत का प्रमुख शेयर सूचकांक BSE Sensex 2,100 अंकों की भारी गिरावट के साथ 76,800 के स्तर पर आ गया। निवेशकों में घबराहट साफ दिखी और दिनभर बिकवाली का दबाव बना रहा।

एशियाई बाजारों में भी बड़ी गिरावट

तनाव का असर सिर्फ भारत तक सीमित नहीं रहा। जापान का Nikkei 225 और दक्षिण कोरिया का KOSPI करीब 7% तक टूट गए। निवेशकों ने सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख किया, जिससे इक्विटी बाजारों में भारी गिरावट दर्ज की गई।

कच्चे तेल में 60% की तेजी

मध्य-पूर्व वैश्विक तेल आपूर्ति का प्रमुख केंद्र है। जंग की आशंका के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में पिछले 10 दिनों में लगभग 60% तक उछाल आ गया है। तेल की बढ़ती कीमतें भारत जैसे आयात-निर्भर देशों के लिए महंगाई और चालू खाते के घाटे की चिंता बढ़ा सकती हैं।

किन सेक्टरों पर सबसे ज्यादा असर?

  • बैंकिंग और फाइनेंशियल शेयरों में भारी बिकवाली

  • ऑटो और एविएशन कंपनियों पर दबाव

  • आईटी सेक्टर में भी कमजोरी

  • तेल विपणन कंपनियों के शेयरों में उतार-चढ़ाव

निवेशकों के लिए क्या संकेत?

विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक भू-राजनीतिक स्थिति स्पष्ट नहीं होती, तब तक बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है। निवेशकों को घबराकर फैसले लेने के बजाय लंबी अवधि की रणनीति अपनाने की सलाह दी जा रही है।

ईरान जंग का असर: सेंसेक्स 2,100 अंक टूटा, वैश्विक बाजारों में हाहाकार; कच्चा तेल 60% उछला

मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव और ईरान से जुड़ी जंग की आशंकाओं ने वैश्विक शेयर बाजारों में भारी उथल-पुथल मचा दी है। भारत का प्रमुख शेयर सूचकांक BSE Sensex 2,100 अंकों की भारी गिरावट के साथ 76,800 के स्तर पर आ गया। निवेशकों में घबराहट साफ दिखी और दिनभर बिकवाली का दबाव बना रहा।

एशियाई बाजारों में भी बड़ी गिरावट

तनाव का असर सिर्फ भारत तक सीमित नहीं रहा। जापान का Nikkei 225 और दक्षिण कोरिया का KOSPI करीब 7% तक टूट गए। निवेशकों ने सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख किया, जिससे इक्विटी बाजारों में भारी गिरावट दर्ज की गई।

कच्चे तेल में 60% की तेजी

मध्य-पूर्व वैश्विक तेल आपूर्ति का प्रमुख केंद्र है। जंग की आशंका के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में पिछले 10 दिनों में लगभग 60% तक उछाल आ गया है। तेल की बढ़ती कीमतें भारत जैसे आयात-निर्भर देशों के लिए महंगाई और चालू खाते के घाटे की चिंता बढ़ा सकती हैं।

किन सेक्टरों पर सबसे ज्यादा असर?

  • बैंकिंग और फाइनेंशियल शेयरों में भारी बिकवाली

  • ऑटो और एविएशन कंपनियों पर दबाव

  • आईटी सेक्टर में भी कमजोरी

  • तेल विपणन कंपनियों के शेयरों में उतार-चढ़ाव

निवेशकों के लिए क्या संकेत?

विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक भू-राजनीतिक स्थिति स्पष्ट नहीं होती, तब तक बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है। निवेशकों को घबराकर फैसले लेने के बजाय लंबी अवधि की रणनीति अपनाने की सलाह दी जा रही है।

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