बजट 2026: 1.72 लाख करोड़ का प्रावधान, वन विभाग में 1000 भर्तियां; रायपुर में तीरंदाजी अकादमी और अबूझमाड़–जगरगुंडा में एजुकेशन सिटी
रायपुर से रिपोर्ट |
राज्य सरकार ने वर्ष 2026–27 के लिए ₹1.72 लाख करोड़ का बजट पेश किया है। बजट में रोजगार, शिक्षा, उद्योग, वन संरक्षण और कर्मचारी कल्याण पर विशेष जोर दिया गया है।
वन विभाग में 1000 पदों पर भर्ती
वन प्रबंधन और संरक्षण को मजबूत करने के लिए वन विभाग में 1000 नए पदों पर भर्ती का प्रावधान किया गया है।
साथ ही, वन संरक्षण और जैव विविधता प्रबंधन के लिए ₹930 करोड़ का बजटीय प्रावधान रखा गया है। इससे निगरानी, पौधारोपण और संरक्षित क्षेत्रों के विकास को गति मिलेगी।
रायपुर में तीरंदाजी अकादमी
राजधानी Raipur में आधुनिक तीरंदाजी अकादमी स्थापित की जाएगी।
उद्देश्य:
-
राज्य के प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को प्रशिक्षण
-
राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर की तैयारी
-
खेल अधोसंरचना का विस्तार
यह पहल खेल क्षेत्र में राज्य की उपस्थिति मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा है।
अबूझमाड़ और जगरगुंडा में एजुकेशन सिटी
नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के शैक्षणिक विकास के लिए अबूझमाड़ और जगरगुंडा में “एजुकेशन सिटी” स्थापित की जाएगी।
यहां:
-
आधुनिक स्कूल और कॉलेज
-
कौशल विकास केंद्र
-
छात्रावास सुविधाएं
स्थापित की जाएंगी, जिससे दूरस्थ क्षेत्रों के छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके।
बच्चियों के लिए ₹1.5 लाख सहायता योजना
बालिका सशक्तिकरण के तहत नई योजना के अंतर्गत जन्म के बाद पंजीकरण कराने वाली बच्चियों को 18 वर्ष की आयु पूर्ण होने पर ₹1.5 लाख की वित्तीय सहायता दी जाएगी।
इसका उद्देश्य:
-
बालिका शिक्षा को प्रोत्साहन
-
बाल विवाह की रोकथाम
-
परिवारों में सकारात्मक सामाजिक संदेश
23 नए उद्योगों की स्थापना
औद्योगिक विकास के लिए 23 नए उद्योगिक प्रोजेक्ट स्थापित करने की घोषणा की गई है।
इससे:
-
स्थानीय रोजगार के अवसर बढ़ेंगे
-
निवेश आकर्षित होगा
-
औद्योगिक आधार मजबूत होगा
कर्मचारियों के लिए कैशलेस इलाज योजना
राज्य कर्मचारियों को राहत देते हुए कैशलेस चिकित्सा सुविधा लागू की जाएगी।
-
मान्यता प्राप्त अस्पतालों में इलाज
-
डिजिटल क्लेम प्रोसेस
-
स्वास्थ्य सुरक्षा कवरेज में विस्तार
बजट का समग्र विश्लेषण
यह बजट तीन प्रमुख क्षेत्रों पर केंद्रित दिखता है:
-
रोजगार और भर्ती
-
शिक्षा एवं खेल अधोसंरचना
-
वन संरक्षण और औद्योगिक विस्तार
विशेषज्ञों का मानना है कि सामाजिक कल्याण और विकास परियोजनाओं के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की गई है।
