पश्चिम बंगाल में 8 महीने बाद वक्फ संशोधन कानून लागू: ममता बनर्जी बोलीं—धर्म के आधार पर बंटवारा स्वीकार नहीं

पश्चिम बंगाल में लंबे इंतजार के बाद आखिरकार वक्फ संशोधन कानून लागू कर दिया गया है। करीब 8 महीने की देरी के बाद राज्य सरकार ने इस महत्वपूर्ण कानून को प्रभावी कर दिया। इस दौरान राजनीतिक बयानबाज़ी, धार्मिक प्रतिनिधियों की प्रतिक्रियाएँ और प्रशासनिक चर्चाएँ लगातार चलती रहीं। अब कानून लागू होने के बाद वक्फ संपत्तियों को लेकर राज्य में नई व्यवस्था शुरू हो गई है।

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इसे “समाज को जोड़ने वाला कदम” बताते हुए कहा कि राज्य किसी भी हालत में धर्म के आधार पर विभाजन की राजनीति स्वीकार नहीं करेगा।

यह फैसला राज्य की राजनीति, वक्फ बोर्ड के प्रशासन, अल्पसंख्यक समुदायों के अधिकार और संपत्ति प्रबंधन पर बड़ा प्रभाव डाल सकता है।

क्यों महत्वपूर्ण है वक्फ संशोधन कानून?

वक्फ संपत्तियाँ भारत के अनेक राज्यों में करोड़ों की कीमत वाली जमीनें, भवन, धार्मिक स्थल और शैक्षणिक संस्थाओं से जुड़ी होती हैं। वर्षों से वक्फ बोर्डों पर अव्यवस्था, फर्जी कब्ज़े, भ्रष्टाचार और राजनीतिक हस्तक्षेप के आरोप लगते रहे हैं।

पश्चिम बंगाल में भी वक्फ संपत्ति घोटालों के कई मामले सामने आए—

  • फर्जी ट्रस्ट बनाकर कब्ज़ा

  • जमीन कम कीमत पर निजी लोगों को आवंटन

  • रिकॉर्ड्स में पारदर्शिता की कमी

  • कानूनी विवादों का बढ़ना

इन सबके बीच संशोधन कानून को लागू करने की मांग बढ़ती गई। 8 महीने पहले केंद्र ने इसे मंजूरी दी थी, मगर राज्य ने कानूनी जटिलताओं और प्रशासनिक प्रक्रियाओं के चलते इसे लागू नहीं किया था।

कानून लागू में 8 महीने की देरी क्यों?

सूत्रों के अनुसार देरी के कई कारण रहे—

  1. कानूनी सलाह और राज्य-केंद्र मतभेद

  2. स्थानीय वक्फ समितियों की आपत्तियाँ

  3. राजनीतिक रूप से संवेदनशील माहौल

  4. संपत्ति रिकॉर्ड सुधार प्रक्रिया अधूरी

  5. बोर्ड पुनर्गठन पर सहमति न बनना

इन कारणों से बंगाल सरकार ने इसे रोक दिया था, लेकिन हाल ही में बढ़ते विवादों के बीच इसे लागू करने का निर्णय लिया गया।

नया वक्फ कानून: क्या प्रमुख बदलाव लाता है?

यह संशोधन पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने पर आधारित है।
मुख्य बदलाव इस प्रकार हैं:

1. वक्फ संपत्ति का डिजिटल रिकॉर्ड अनिवार्य

सारी संपत्तियों को GIS, ड्रोन मैपिंग और ऑनलाइन रजिस्ट्री से जोड़ना होगा।

2. अवैध कब्जों पर कड़ी कार्रवाई

अब वक्फ बोर्ड को अतिक्रमण हटाने, कानूनी दावा करने और FIR दर्ज कराने की अधिक शक्तियाँ होंगी।

3. ट्रांसफर और लीज पर सख्ती

बिना बोर्ड और राज्य की अनुमति के किसी भी वक्फ संपत्ति को लीज, सब-लीज या ट्रस्ट में नहीं दिया जा सकेगा।

4. बोर्ड सदस्यों की नियुक्ति प्रक्रिया पारदर्शी

राज्य सरकार को नियुक्तियों में स्पष्ट दिशा-निर्देशों का पालन करना होगा।

5. धार्मिक एवं सामाजिक संस्थानों के लिए सुरक्षा

कई मदरसों, मस्जिदों और कब्रिस्तानों से संबंधित मामलों का समाधान तेज़ी से होगा।

ममता बनर्जी का बयान: “धर्म के आधार पर बंटवारा स्वीकार नहीं”

कानून लागू करने के साथ ही मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने साफ कहा कि—

“पश्चिम बंगाल किसी भी हालत में धार्मिक आधार पर विभाजन की राजनीति नहीं अपनाएगा। वक्फ संपत्ति का मुद्दा धार्मिक नहीं, प्रशासनिक और कानूनी है। हम समाज को बाँटने वाली किसी ताकत को सफल नहीं होने देंगे।”

उनका यह बयान विपक्ष पर सीधा हमला माना जा रहा है।

राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ

तृणमूल कांग्रेस (TMC)

TMC ने इसे “अल्पसंख्यकों के हित में ऐतिहासिक कदम” बताया है और दावा किया कि इससे संपत्ति घोटालों पर रोक लगेगी।

BJP

बीजेपी ने कहा कि

  • यह फैसला देर से लिया गया है

  • कानून लागू न करके TMC ने 8 महीने तक मामले को रोके रखा

  • सख्त कार्रवाई केवल कागजों पर न रहे, यह सुनिश्चित किया जाए

कांग्रेस और वाम दल

दोनों ने इसे सकारात्मक बताया, लेकिन कहा कि इसका प्रभाव तभी दिखेगा जब वक्फ संपत्तियों का वास्तविक सर्वे और कार्रवाई हो।

वक्फ बोर्ड की प्रतिक्रिया

वक्फ बोर्ड के कई सदस्यों ने स्वागत किया है, लेकिन कुछ आंतरिक सदस्यों ने संपत्ति सर्वे को लेकर चिंता जताई है।
कई लोग चाहते हैं कि:

  • पुराने रिकॉर्ड की पुनः जांच हो

  • विवादित संपत्तियों का निपटारा तेजी से हो

  • भ्रष्टाचार में शामिल लोगों पर कार्रवाई हो

राज्य की मुस्लिम आबादी पर असर

पश्चिम बंगाल में मुस्लिम आबादी लगभग 27% है, जो देश में सबसे अधिक प्रतिशत वाले राज्यों में शामिल है।
वक्फ संपत्तियों का बड़ा हिस्सा इन्हीं क्षेत्रों में स्थित है।

कानून लागू होने से:

  • धार्मिक संस्थानों को सुरक्षा मिलेगी

  • सामाजिक सुविधाओं में सुधार होगा

  • कई लंबित कानूनी विवाद हल हो सकेंगे

  • मदरसों और सामाजिक संगठनों को लाभ होगा

विवादित संपत्तियाँ भी आएँगी घेरे में

राज्य में लाखों करोड़ की वक्फ संपत्तियाँ शामिल हैं।
नई व्यवस्था के बाद:

  • भू-माफिया पर कार्रवाई

  • फर्जी लीज समझौते रद्द

  • कब्जाधारियों को नोटिस

  • रिकॉर्ड्स की मैपिंग तेज

कई बड़े शहरों—कोलकाता, हावड़ा, मुर्शिदाबाद, मालदा—में जांच की तैयारी है।

आगे का रोडमैप

सरकारी सूत्रों के अनुसार अगले 3–6 महीनों में:

  • सभी जिलों में डिजिटल रजिस्ट्री

  • संपत्तियों का फिजिकल सर्वे

  • बोर्ड पुनर्गठन

  • संदिग्ध मामलों की समीक्षा

  • अतिक्रमण हटाने के अभियान

तैयार किए जाएंगे।

निष्कर्ष

8 महीने की देरी के बाद वक्फ संशोधन कानून लागू होने से पश्चिम बंगाल में संपत्ति प्रबंधन, पारदर्शिता और धार्मिक संस्थाओं की सुरक्षा पर बड़ा प्रभाव पड़ेगा।
राजनीतिक बयानबाज़ी के बीच सरकार का संदेश स्पष्ट है—
वक्फ संपत्तियों को लेकर पारदर्शिता और सुधार जरूरी है, लेकिन किसी भी तरह का धार्मिक विभाजन स्वीकार नहीं किया जाएगा।