छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने ₹5,000 करोड़ पीडीएस घोटाले की जांच को CBI/SIT को ट्रांसफर करने की मांग खारिज की

रायपुर, 13 अक्टूबर 2025

छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने आज एक महत्वपूर्ण फैसले में राज्य के चर्चित ₹5,000 करोड़ के सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) घोटाले की जांच को CBI या SIT को सौंपने की मांग खारिज कर दी है। अदालत ने कहा कि राज्य पुलिस द्वारा की जा रही जांच में किसी भी प्रकार की लापरवाही या पक्षपात का कोई ठोस प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया गया है।

मामला क्या है?

यह मामला छत्तीसगढ़ में पिछले कुछ वर्षों में हुए पीडीएस घोटाले से जुड़ा है, जिसमें आरोप लगाया गया था कि राशन वितरण प्रणाली में बड़े पैमाने पर अनियमितताएँ हुईं। शिकायतकर्ताओं का कहना था कि राशन सामग्री की सप्लाई, परिवहन और वितरण में फर्जी बिल, वजन में गड़बड़ी और कालाबाजारी जैसे गंभीर अपराध किए गए, जिससे राज्य को हजारों करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।

इस मामले में कुछ याचिकाकर्ताओं ने उच्च न्यायालय में अर्जी दायर कर मांग की थी कि इस घोटाले की जांच राज्य पुलिस से हटाकर CBI या SIT को सौंपी जाए, ताकि जांच निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से हो सके।

अदालत ने क्या कहा

मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि राज्य पुलिस ने अब तक जांच में कई दस्तावेज और साक्ष्य एकत्र किए हैं, और जांच की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है।
अदालत ने टिप्पणी की —

“सिर्फ संदेह या अनुमान के आधार पर किसी जांच एजेंसी को बदलना उचित नहीं है। जब तक यह साबित न हो जाए कि स्थानीय पुलिस जांच को प्रभावित कर रही है या पक्षपात कर रही है, तब तक CBI या SIT को जांच सौंपने का कोई औचित्य नहीं बनता।”

अदालत ने यह भी कहा कि यदि भविष्य में जांच में कोई ठोस लापरवाही या पक्षपात पाया जाता है, तो याचिकाकर्ता दोबारा अदालत का दरवाज़ा खटखटा सकते हैं।

राज्य सरकार की दलील

राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता ने अदालत में कहा कि पीडीएस विभाग और पुलिस की विशेष जांच टीम (SIT) ने पहले से ही कई स्तरों पर जांच की है।
अब तक विभागीय रिकॉर्ड, परिवहन अनुबंध, और राशन वितरण के आंकड़ों की बारीकी से जांच की जा रही है।
राज्य सरकार का यह भी कहना था कि CBI को जांच सौंपने से प्रक्रिया और भी लंबी हो जाएगी, जिससे पीड़ितों को न्याय मिलने में देरी होगी।

विपक्ष की प्रतिक्रिया

विपक्षी दलों ने इस फैसले पर नाराजगी जताई है। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि राज्य सरकार जांच को प्रभावित कर रही है और जब तक केंद्रीय एजेंसी द्वारा जांच नहीं होगी, तब तक सच्चाई सामने नहीं आएगी।
वहीं, सत्तारूढ़ भाजपा ने अदालत के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि यह निर्णय राज्य प्रशासन की पारदर्शिता और न्याय प्रणाली में विश्वास का प्रतीक है।

जांच की वर्तमान स्थिति

सूत्रों के अनुसार, पुलिस ने अब तक कई सरकारी और निजी आपूर्तिकर्ताओं से पूछताछ की है और करोड़ों रुपये के संदिग्ध लेनदेन की जानकारी जुटाई है।
कई जिलों में फर्जी बिल, राशन रसीदों में हेराफेरी और कालाबाजारी के सबूत भी मिले हैं। जांच एजेंसियां अब आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।

निष्कर्ष

छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय का यह फैसला राज्य की न्याय व्यवस्था में एक अहम मिसाल के रूप में देखा जा रहा है।
अदालत ने साफ संकेत दिया है कि न्यायिक दखल सिर्फ तब ही होगा जब जांच में स्पष्ट रूप से गड़बड़ी साबित हो।
अब देखना यह होगा कि राज्य पुलिस इस हाई-प्रोफाइल पीडीएस घोटाले की जांच को कितनी तेजी और पारदर्शिता से आगे बढ़ाती है।