6,000 करोड़ के महादेव सट्टा घोटाले में नया मोड़: सौरभ चंद्राकर ने छत्तीसगढ़ के युवाओं को किया आउट ऑफ सिस्टम

देशभर में सुर्खियों में रहे 6,000 करोड़ रुपये के महादेव ऑनलाइन सट्टा घोटाले की जांच अब अपने निर्णायक मोड़ पर पहुंचती दिख रही है। CBI और ED की लगातार कार्रवाई के चलते महादेव बुक के प्रमोटर सौरभ चंद्राकर ने छत्तीसगढ़ के युवाओं को अपने नेटवर्क से बाहर करने का फैसला लिया है। खासतौर पर रायपुर और दुर्ग-भिलाई के युवकों की भर्ती पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है, क्योंकि यही समूह केंद्रीय एजेंसियों की रडार पर है।

ट्रांजैक्शन और बैंकिंग लिंक भी ब्लॉक

सूत्रों की मानें तो छत्तीसगढ़ से जुड़े बैंक खातों के जरिए किसी भी प्रकार का ट्रांजैक्शन रोकने के निर्देश भी महादेव नेटवर्क द्वारा जारी किए गए हैं, ताकि फंड फ्लो का डिजिटल लिंक अधिकारियों तक न पहुंचे। CBI द्वारा की गई पिछली गिरफ्तारियों से कई बड़े कनेक्शन सामने आए, जिनके आधार पर जांच को दिशा मिली।

हेडक्वार्टर दुबई से श्रीलंका शिफ्ट

जांच बढ़ने और अंतरराष्ट्रीय दबाव के चलते महादेव बुक का मुख्यालय अब दुबई से श्रीलंका शिफ्ट कर दिया गया है। दुबई से लौटे कई पूर्व कर्मचारी इस बात की पुष्टि करते हैं। उनका कहना है कि अब आईडी जेनरेशन, मनी ट्रांसफर और लॉन्ड्रिंग ऑपरेशन पूरी तरह श्रीलंका से संचालित हो रहे हैं।

यूएई सरकार की आपत्ति के बाद, नेटवर्क को दबाव में आकर स्थानांतरित किया गया। हालांकि प्रमोटर सौरभ चंद्राकर अब भी दुबई में ही रह रहा है।

वानुआतू की नागरिकता और निवेश का नेटवर्क

प्रमोटर्स सौरभ चंद्राकर और रवि उत्पल के पास अब वानुआतू की नागरिकता है। बताया जा रहा है कि महादेव नेटवर्क के जरिए अब तक 4,000 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया जा चुका है। उनके खिलाफ 70 से अधिक FIR दर्ज हैं और लुकआउट नोटिस भी जारी किया जा चुका है।

मार्च 2025 में CBI ने इस केस में कई बड़ी छापेमारी की, जिसमें पूर्व मुख्यमंत्री, पूर्व विधायक, आईएएस और पुलिस अफसरों के ठिकानों से अहम दस्तावेज जब्त किए गए।

500 करोड़ से ऊपर का कारोबार, हजारों लड़के नेटवर्क में

महादेव बुक के नेटवर्क में अभी भी 4,000 से अधिक युवक काम कर रहे हैं, जिन्हें 30,000 से लेकर 1 लाख रुपये तक की सैलरी और आलीशान जीवनशैली दी जा रही है। सूत्रों का कहना है कि यह नेटवर्क हर महीने 500 करोड़ से अधिक का कारोबार कर रहा है।

ग्राउंड रिपोर्ट: दुबई से लौटे युवाओं की गवाही

कुछ युवकों ने बताया कि:

  • “जो चाहिए सब मिलता है…”
    दुबई में रहने और काम करने के दौरान खर्च नहीं होता था। महंगी ज़िंदगी, ब्रांडेड चीजें और हाई पे स्केल आम बात थी।

  • “अब छत्तीसगढ़ के लड़के बैन हैं…”
    दुर्ग और रायपुर से जुड़े पैनल्स अब डिलीट किए जा चुके हैं। सिस्टम में छत्तीसगढ़ की एंट्री लगभग बंद कर दी गई है।

  • “पुलिसवाले के मकान से की थी शुरुआत…”
    सौरभ ने पहले दुर्ग के राधिका नगर इलाके में एक पुलिसकर्मी के किराए के मकान से रेड्डी अन्ना का पैनल चलाना शुरू किया था।

    लोकल से इंटरनेशनल तक का सफर

    साल 2019 में दुबई से लॉन्च हुआ महादेव बुक नेटवर्क कोरोना काल में तेज़ी से फैला। पहले छोटे एजेंट्स के माध्यम से पैनल बेचे गए। बाद में रेड्डी अन्ना से 1,000 करोड़ की डील के बाद नेटवर्क का दायरा और भी बढ़ा। आज इसका यूज़र बेस 60 लाख से अधिक है।

जांच एजेंसियों के लिए बड़ा सिरदर्द

CBI, ED और राज्य पुलिस के लिए यह घोटाला अब केवल आर्थिक अपराध नहीं, बल्कि साइबर क्राइम, मनी लॉन्ड्रिंग और हवाला नेटवर्क की एक जटिल कड़ी बन चुका है।

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