BSF जवान 48 घंटे से पाकिस्तान की हिरासत में, तीन फ्लैग मीटिंग बेनतीजा; पहलगाम हमले के बाद दोनों देशों में तनाव
भारत-पाकिस्तान बॉर्डर से गलती से जीरो लाइन पार कर गए बीएसएफ जवान पीके साहू को पाकिस्तानी रेंजर्स ने 48 घंटे बीतने के बाद भी नहीं लौटाया है। इस मामले को लेकर दोनों देशों के बीच अब तक तीन फ्लैग मीटिंग हो चुकी हैं, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला है।
सूत्रों के मुताबिक, पाकिस्तान की इस हठधर्मी का कारण हाल ही में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुआ आतंकी हमला भी हो सकता है। इस हमले के बाद से दोनों देशों के बीच तनाव गहरा गया है।
कैसे हुआ मामला शुरू?
श्रीनगर से आई बीएसएफ की 24वीं बटालियन ममदोट सेक्टर में तैनात है। बुधवार सुबह कुछ किसान गेहूं की कटाई के लिए फेंसिंग के पास गेट नंबर 208/1 तक पहुंचे थे। सुरक्षा के लिए दो बीएसएफ जवान भी साथ थे। इसी दौरान पीके साहू गलती से जीरो लाइन पार कर गए। पाकिस्तानी रेंजर्स ने मौके पर उन्हें पकड़ लिया और उनके हथियार भी अपने कब्जे में ले लिए।
BSF का प्रयास, लेकिन पाकिस्तान टस से मस नहीं
जवान के पकड़े जाने की सूचना मिलते ही बीएसएफ अधिकारी मौके पर पहुंचे और पाकिस्तानी रेंजर्स से बातचीत शुरू की। उन्होंने बताया कि पीके साहू हाल ही में ट्रांसफर होकर यहां आए थे और उन्हें जीरो लाइन की जानकारी नहीं थी। बावजूद इसके, पाकिस्तान ने जवान को रिहा करने से इनकार कर दिया।
तीन बार मीटिंग, फिर भी कोई हल नहीं
अब तक बीएसएफ और पाकिस्तानी रेंजर्स के बीच तीन फ्लैग मीटिंग हो चुकी हैं, लेकिन हर बार बातचीत बेनतीजा रही है। इस देरी को लेकर बीएसएफ और भारत सरकार में चिंता बढ़ रही है।
परिवार की अपील: “साहू को जल्द वापस लाएं”
पीके साहू के भाई श्यामसुंदर साहू ने मीडिया से बात करते हुए केंद्र सरकार और बीएसएफ अधिकारियों से अपील की कि जवान की सुरक्षित और तत्काल वापसी सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा, “पूरा परिवार बेहद चिंतित है।”
वहीं, पीके साहू की पत्नी रजनी साहू सदमे में हैं। उन्होंने बताया कि एक सहकर्मी का फोन आने के बाद उन्हें इस घटना की जानकारी मिली।
31 मार्च को लौटे थे ड्यूटी पर
करीब 40 वर्षीय पीके साहू 31 मार्च को छुट्टी से लौटे थे। वे बीएसएफ में 17 साल से सेवा दे रहे हैं। वह अपने माता-पिता, पत्नी और 7 साल के बेटे के साथ रहते हैं। उनकी गैरमौजूदगी ने पूरे परिवार को हिला कर रख दिया है।
जीरो लाइन क्या होती है?
जीरो लाइन वह बेहद संवेदनशील सीमा होती है, जहां भारत और पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय सीमाएं बेहद पास होती हैं। यहां सीमित समय में किसानों को खेती की अनुमति दी जाती है। उनकी सुरक्षा के लिए बीएसएफ जवानों की तैनाती होती है, जिन्हें ‘किसान गार्ड’ भी कहा जाता है।
प्रोटोकॉल क्या कहता है?
ऐसे मामलों में आमतौर पर 24 घंटे के भीतर पकड़े गए जवान को लौटा दिया जाता है। लेकिन पहलगाम आतंकी हमले के बाद हालात असामान्य हो गए हैं। अधिकारियों के अनुसार, पहले ऐसे मामलों में फ्लैग मीटिंग के बाद तत्काल रिहाई हो जाया करती थी, लेकिन इस बार बात अटक गई है।
नज़रें अब पाकिस्तान की अगली प्रतिक्रिया पर
जवान की सुरक्षित वापसी को लेकर भारत लगातार पाकिस्तान पर दबाव बना रहा है। यह देखना अहम होगा कि पाकिस्तानी रेंजर्स अब अगला क्या रुख अपनाते हैं।
