बिलासपुर के अनिमेष चतुर्वेदी बने भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट, 23 साल की उम्र में हासिल की यह शानदार उपलब्धि

बिलासपुर के सूर्य विहार निवासी अनिमेष चतुर्वेदी ने भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट बनकर शहर का नाम रोशन किया है। महज 23 साल की उम्र में उन्होंने यह बड़ी उपलब्धि हासिल की है, जो उनके कड़ी मेहनत और समर्पण का परिणाम है।

अनिमेष एक कुशल बांसुरी वादक भी हैं, और उन्होंने अपनी कला के क्षेत्र में भी कई उपलब्धियां हासिल की हैं। उनके पिता, संजय चौबे, ने बताया कि अनिमेष के व्यक्तित्व निर्माण में उनकी बुआ पूनम तिवारी और स्व. यू.एस. तिवारी का विशेष योगदान रहा। इसके अलावा, उनकी बहन गुंजन तिवारी और डॉ. कृष्णा ने पढ़ाई में मार्गदर्शन किया, जबकि उनके चाचा आनंद नाथ चौबे से उन्हें सेना में जाने की प्रेरणा मिली।

अनिमेष ने अपनी शुरुआती शिक्षा बिलासपुर जिले के महर्षि विद्या मंदिर से की और सीबीएसई बोर्ड से 12वीं की परीक्षा उत्तीर्ण की। इसके बाद, उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के किरोड़ीमल कॉलेज से ग्रेजुएशन किया।

बचपन से ही पढ़ाई में होशियार अनिमेष ने सेना में जाने का सपना देखा और कड़ी मेहनत से इसे साकार किया। उनका यह सपना अब हकीकत बन चुका है।

इसके साथ ही, अनिमेष को संगीत में भी गहरी रुचि है। उन्होंने स्कूल में बांसुरी वादन में क्षेत्रीय प्रतियोगिता में पदक जीते और बाद में किरोड़ीमल कॉलेज का प्रतिनिधित्व करते हुए मुंबई के अंतरराष्ट्रीय म्यूजिकल फेस्टिवल में प्रस्तुति दी।

सेना में प्रशिक्षण के दौरान भी उनके बांसुरी वादन को सराहा गया। सैन्य सांस्कृतिक कार्यक्रम में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए एकेडमी के कमांडेंट ने उन्हें प्रशस्ति पत्र से सम्मानित किया। अनिमेष चतुर्वेदी का यह सफर प्रेरणादायक है और उन्होंने यह साबित कर दिया कि संकल्प और मेहनत से किसी भी लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है।