ऑक्सीजन की कमी और एंबुलेंस चालक की लापरवाही से युवक की मौत, अस्पताल से इंदौर रेफर करते समय हुआ हादसा
खंडवा जिले में एक दिल दहला देने वाली घटना ने अस्पताल व्यवस्था की खामियों और एंबुलेंस सेवाओं की लापरवाही को उजागर किया। एक युवक की जान इसलिए चली गई क्योंकि उसे समय पर ऑक्सीजन नहीं मिल पाई और एंबुलेंस चालक की लापरवाही ने उसे बचाने का कोई मौका नहीं दिया।
28 वर्षीय धर्मेंद्र, जो एक विद्युत कंपनी में लाइन हेल्पर था, सड़क हादसे में घायल हो गया था। रात करीब 8 बजे घर लौटते समय अज्ञात वाहन ने उसकी बाइक को टक्कर मार दी, जिसके बाद उसे गंभीर चोटें आईं। धर्मेंद्र को तत्काल जिला अस्पताल लाया गया, जहां उसकी हालत नाजुक देख उसे इंदौर रेफर करने का निर्णय लिया गया। लेकिन इस दौरान हुई लापरवाही ने उसकी जान ले ली। 108 एंबुलेंस के चालक और ईएमटी को पता चला कि एंबुलेंस में ऑक्सीजन सिलेंडर खत्म हो चुका था। इसके बाद वे घायल को इंदौर ले जाने के बजाय ऑक्सीजन सिलेंडर लेने के लिए एक गोदाम पर पहुंचे। इस पूरी प्रक्रिया में दो घंटे लग गए, और तब तक धर्मेंद्र के मुंह पर खाली ऑक्सीजन मास्क लगा था।
एंबुलेंस चालक ने बताया कि उन्हें ऑक्सीजन लेने के लिए सात अधिकारियों से अनुमति लेनी पड़ी, क्योंकि उनके पास भुगतान के लिए पैसे नहीं थे। इस प्रक्रिया में ही समय बर्बाद हो गया और आखिरकार रात के एक बजे उन्हें सिलेंडर मिला। लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी, और कुछ समय बाद धर्मेंद्र की मौत हो गई।
स्वजनों ने मोघट थाने में शिकायत दर्ज कराई, और मामले की जांच शुरू कर दी गई है। एंबुलेंस एजेंसी के जोनल मैनेजर ने मौत के लिए मरीज की गंभीर हालत को जिम्मेदार ठहराया, लेकिन स्वजनों का आरोप है कि ऑक्सीजन की कमी और चालक की लापरवाही ने धर्मेंद्र की जान ले ली। यह घटना एक बार फिर अस्पताल सेवाओं और एंबुलेंस प्रबंधन में सुधार की सख्त आवश्यकता को रेखांकित करती है, ताकि भविष्य में ऐसी अनहोनी घटनाओं से किसी और की जान न जाए।
