ट्रम्प का स्टेट ऑफ द यूनियन संबोधन: ईरान परमाणु कार्यक्रम खत्म करने का दावा, इजराइल–हमास सीजफायर पर बयान; डेमोक्रेट्स ने कहा “भ्रामक”

वॉशिंगटन से रिपोर्ट

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अपने स्टेट ऑफ द यूनियन संबोधन में ईरान, पश्चिम एशिया और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर बड़े दावे किए। उन्होंने कहा कि उनके कार्यकाल के दौरान ईरान के परमाणु कार्यक्रम को “प्रभावी रूप से निष्प्रभावी” कर दिया गया था। साथ ही, ट्रम्प ने इजराइल–हमास के बीच संघर्ष विराम (सीजफायर) कराने में अपनी भूमिका का उल्लेख किया।

हालांकि, विपक्षी डेमोक्रेट सांसदों ने उनके इन दावों को “भ्रामक” और “राजनीतिक बयानबाज़ी” करार दिया।

ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर क्या कहा?

ट्रम्प ने अपने संबोधन में कहा कि उनकी “मैक्सिमम प्रेशर” नीति के चलते ईरान की परमाणु महत्वाकांक्षाओं को गंभीर झटका लगा। उन्होंने दावा किया कि कठोर आर्थिक प्रतिबंधों और कूटनीतिक दबाव के कारण ईरान की परमाणु गतिविधियाँ सीमित हुईं।

हालांकि, आलोचकों का कहना है कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों की रिपोर्टें अलग संकेत देती रही हैं और यह दावा तथ्यात्मक रूप से जटिल है।

इजराइल–हमास संघर्ष पर बयान

ट्रम्प ने कहा कि उनके प्रशासन की नीतियों ने पश्चिम एशिया में स्थिरता को बढ़ावा दिया और इजराइल तथा हमास के बीच सीजफायर के लिए अनुकूल माहौल बनाया।

उन्होंने अब्राहम समझौते (Abraham Accords) का भी उल्लेख करते हुए इसे क्षेत्रीय शांति की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।

डेमोक्रेट सांसदों का तर्क है कि इजराइल–हमास संघर्ष बहु-आयामी और दीर्घकालिक है, जिसे केवल एक प्रशासन की नीति से जोड़कर देखना सरलीकरण होगा।

डेमोक्रेट्स की प्रतिक्रिया

विपक्षी डेमोक्रेट नेताओं ने ट्रम्प के दावों को “भ्रामक” बताते हुए कहा कि:

  • ईरान परमाणु समझौते (JCPOA) से अमेरिका के हटने के बाद क्षेत्रीय तनाव बढ़ा।

  • सीजफायर और शांति वार्ताओं में कई अंतरराष्ट्रीय पक्ष शामिल रहे।

  • घरेलू और वैश्विक सुरक्षा पर वास्तविक प्रभाव का मूल्यांकन तथ्यों के आधार पर होना चाहिए।

राजनीतिक विश्लेषण

विशेषज्ञों के अनुसार, यह संबोधन आगामी चुनावी माहौल में राष्ट्रीय सुरक्षा को प्रमुख मुद्दा बनाने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

ट्रम्प का फोकस तीन मुख्य बिंदुओं पर रहा:

  1. कठोर विदेश नीति

  2. ईरान के खिलाफ प्रतिबंध

  3. पश्चिम एशिया में अमेरिकी नेतृत्व

दूसरी ओर, डेमोक्रेट्स इसे “अतिशयोक्ति” बताते हुए तथ्यों की स्वतंत्र जांच की मांग कर रहे हैं।

निष्कर्ष

स्टेट ऑफ द यूनियन संबोधन में ट्रम्प ने ईरान और इजराइल–हमास संघर्ष को लेकर बड़े दावे किए, लेकिन विपक्ष ने उन्हें चुनौती दी है।

अब यह बहस केवल विदेश नीति तक सीमित नहीं है, बल्कि अमेरिकी राजनीति में चुनावी विमर्श का भी प्रमुख हिस्सा बनती दिख रही है।

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