भारतीय अर्थव्यवस्था को सहारा: RBI ने रेपो रेट घटाई, तरलता बढ़ाई

मुंबई, 5 दिसंबर 2025 — भारतीय रिजर्व बैंक ने आज आर्थिक वृद्धि को गति देने के उद्देश्य से अपनी प्रमुख नीतिगत दर में कटौती की। रेपो रेट को 25 बेसिस पॉइंट्स घटाकर 5.25 प्रतिशत कर दिया गया। इसके साथ ही वित्तीय प्रणाली में तरलता बढ़ाने के लिए दो बड़े कदम भी घोषित किए गए:

  • लगभग एक लाख करोड़ रुपये के सरकारी बांड की खरीद

  • 5 अरब डॉलर के डॉलर-रुपया स्वैप की योजना, जिसकी अवधि तीन वर्ष होगी

प्रमुख बिंदु

  • महंगाई (मुद्रास्फीति) फिलहाल नियंत्रण में है, इसलिए दरों में कटौती की गुंजाइश बनी।

  • रेपो रेट कम होने से बैंकों की उधारी लागत घट सकती है और होम लोन, ऑटो लोन तथा बिजनेस लोन की ब्याज दरों में कमी आने की संभावना है।

  • बांड की खरीद और FX स्वैप से बाजार में नकदी की उपलब्धता बढ़ेगी और रुपये की स्थिरता को समर्थन मिलेगा।

  • RBI ने अपनी नीति-दृष्टि को “न्यूट्रल” रखा है, ताकि आगे भी स्थिति के अनुसार निर्णय लिया जा सके।

बाजार और अर्थव्यवस्था पर असर

  • कम ब्याज दरें निवेश और क्रेडिट-डिमांड को बढ़ाने में मदद कर सकती हैं।

  • बांड मार्केट में सुधार और यील्ड में नरमी की संभावना है, जिससे सरकार और कॉर्पोरेट दोनों के लिए उधारी आसान हो सकती है।

  • विदेशी और घरेलू निवेशक भावना को सकारात्मक संकेत मिला है, जो बाजार में स्थिरता लाने में सहायक होगा।

घर-परिवार और व्यवसाय के लिए क्या बदलेगा

  • होम-लोन लेने वालों के लिए EMI में राहत की उम्मीद बढ़ी है।

  • छोटे व्यवसायों, MSMEs, और स्टार्ट-अप्स के लिए बैंक और वित्तीय संस्थानों से ऋण लेना अपेक्षाकृत आसान हो सकता है।

  • जिन क्षेत्रों में कैपिटल की आवश्यकता अधिक होती है, जैसे रियल एस्टेट, इंफ्रास्ट्रक्चर, टेक्नोलॉजी और मैन्युफैक्चरिंग, वहां गतिविधियाँ तेज हो सकती हैं।

छात्रों और टेक-सेक्टर के लिए महत्वपूर्ण

  • तकनीकी और स्टार्ट-अप इकोसिस्टम में फंडिंग की पहुँच बेहतर हो सकती है।

  • बैंकिंग-फिनटेक सेक्टर में ऋण की लागत घटने से नए प्रोजेक्ट्स और नवाचार को बढ़ावा मिलेगा।

  • अर्थव्यवस्था में स्थिरता आने से नौकरी के अवसर और निवेश योजनाएँ मजबूत हो सकती हैं।

आगे की राह

विशेषज्ञों के अनुसार, यदि महंगाई नियंत्रित रहती है और वृद्धि मजबूत रहती है, तो भविष्य में और दर कटौती पर विचार संभव है। फिलहाल, RBI का झुकाव वृद्धि को समर्थन देने की ओर स्पष्ट रूप से दिखाई देता है, जबकि मूल्य-स्थिरता पर भी समान नजर बनी हुई है।