राजधानी दिल्ली में गूंजे “हिड़मा अमर रहे” के नारे: माओवादियों के समर्थन में नारेबाजी, प्रदूषण के खिलाफ प्रदर्शन करने पहुंचे थे छात्र
राजधानी दिल्ली में प्रदूषण के खिलाफ आयोजित एक प्रदर्शन उस समय विवादों में घिर गया जब भीड़ के बीच से “हिड़मा अमर रहे” जैसे नारे लगाए गए। माओवादी कमांडर हिड़मा के समर्थन में की गई इस नारेबाजी ने सुरक्षा एजेंसियों के साथ-साथ राजनीतिक हलकों में भी चिंता बढ़ा दी है।
प्रदर्शन प्रदूषण विरोधी, लेकिन नारे अचानक बदले
सूत्रों के अनुसार, शहर के एक प्रमुख स्थल पर छात्र प्रदूषण को लेकर प्रदर्शन करने पहुंचे थे। शुरुआत में प्रदर्शन का एजेंडा पूरी तरह पर्यावरण और वायु गुणवत्ता पर केंद्रित था, लेकिन भीड़ में मौजूद कुछ छात्रों और बाहरी तत्वों ने अचानक माओवादी समर्थन के नारे लगाने शुरू कर दिए।
इसके बाद प्रदर्शन का माहौल बदल गया और पुलिस को अतिरिक्त बल तैनात करना पड़ा।
माओवादी समर्थन वाले नारे से पुलिस सतर्क
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि “हिड़मा अमर रहे” जैसे नारे बेहद गंभीर हैं क्योंकि वे वांछित और अत्यंत सक्रिय माओवादी नेता हिड़मा से जुड़े हैं, जो कई बड़े नक्सली हमलों का मास्टरमाइंड माना जाता है। अधिकारियों ने नारे लगाने वालों की पहचान करने के लिए वीडियो फुटेज और सोशल मीडिया रिकॉर्ड की जांच शुरू कर दी है।
सूत्र कहते हैं कि यह भी जांच की जा रही है कि नारे लगाने वाले वास्तव में छात्र थे या किसी संगठन से जुड़े बाहरी लोग।
राजनीतिक हलकों में नाराजगी
घटना के बाद कई राजनीतिक दलों ने इस नारेबाजी की कड़ी निंदा की है। उनका कहना है कि प्रदूषण जैसे मुद्दे के बीच माओवादी समर्थन का एजेंडा चलाना लोकतांत्रिक विरोध की भावना का दुरुपयोग है।
आयोजकों ने撥 जिम्मेदारी से किया इनकार
प्रदर्शन आयोजित करने वाले समूह ने कहा कि उनका नक्सलवाद या किसी भी गैरकानूनी विचारधारा से कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने दावा किया कि नारे लगाने वाले लोग उनकी टीम का हिस्सा नहीं थे और उन्होंने कार्यक्रम को बदनाम करने की कोशिश की।
आगे की कार्रवाई
पुलिस सीसीटीवी फुटेज के आधार पर आरोपियों की पहचान करने में जुटी हुई है। यदि माओवादी समर्थन की संगठित कोशिश के सबूत मिलते हैं, तो UAPA सहित गंभीर धाराएं लगाई जा सकती हैं।
