CGPSC सिविल जज बनीं श्वेता दीवान, दुधमुंहे बच्चे को गोद में लेकर की तैयारी
श्वेता दीवान की सफलता की कहानी किसी प्रेरणा से कम नहीं है। सिविल जज बनने का सपना उन्होंने जब देखा, तो उन्हें नहीं पता था कि इस रास्ते में कितनी कठिनाइयाँ आएंगी। लेकिन एक माँ, एक पत्नी और एक मेहनती स्टूडेंट के तौर पर श्वेता ने हर चुनौती का सामना किया और आखिरकार दूसरे प्रयास में CGPSC की परीक्षा को न सिर्फ क्रैक किया, बल्कि उसमें टॉप भी किया।

श्वेता बताती हैं, “पहले अटेम्प्ट के दौरान मैं प्रेग्नेंट थी। डिलीवरी की डेट मेंस के दौरान ही थी, लेकिन मैंने तय किया कि परीक्षा दूँगी। मैंने प्री-डिलीवरी करवाई और नवजात बच्चे को छोड़कर परीक्षा देने गई। बाद में मैं इंटरव्यू राउंड तक भी पहुंची, लेकिन सिलेक्शन नहीं हो पाया।”इस अनुभव के बाद श्वेता को थोड़ी निराशा जरूर हुई, लेकिन भगवान पर पूरा विश्वास रखते हुए उन्होंने हार नहीं मानी। दूसरे अटेम्प्ट में उनका बच्चा अब 4 महीने का हो चुका था, और इस बार श्वेता ने पूरी मेहनत के साथ परीक्षा की तैयारी शुरू की। “मेरे पति सुयश और परिवार के अन्य सदस्य भी मेरे साथ थे, उन्होंने हर कदम पर मेरा समर्थन किया। इसके साथ ही ऊपर वाले का भी साथ मिला, और मैंने पूरी मेहनत की। यही मेहनत का परिणाम था कि मैंने इस बार टॉप किया।”
श्वेता की जर्नी बहुत ही दिलचस्प रही। वह कहती हैं, “मैंने शुरू में मैथ्स से पढ़ाई की थी, फिर इंजीनियरिंग की। बालको में असिस्टेंट मैनेजर के पद पर काम भी किया। 2018 में शादी के बाद तय किया कि अब मुझे सिविल जज बनना है, और 2019 में मैंने लॉ की पढ़ाई शुरू की।”इंटरव्यू में श्वेता को जजमेंट, RTI, इंडियन अमेंडमेंट एक्ट और विल को प्रूफ करने जैसे जटिल सवाल पूछे गए। लेकिन उनका आत्मविश्वास और मेहनत ने उन्हें सफलता दिलाई।
अब जब वह सिविल जज बन चुकी हैं, तो श्वेता कहती हैं, “मैं हमेशा से जूडिशियरी से प्रभावित रही हूँ, खासकर जब मैंने हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई ऑनलाइन देखी। मुझे एहसास हुआ कि यह न्याय का सबसे सशक्त माध्यम है, और इसमें मेरा योगदान होना चाहिए। मैं हमेशा कोशिश करूंगी कि अपने काम में और खुद में सुधार कर सकूँ।”श्वेता दीवान की यह कहानी न केवल कठिनाइयों का सामना करने की प्रेरणा देती है, बल्कि यह दिखाती है कि अगर मन में ठान लिया जाए, तो कोई भी मुश्किल आपकी राह में नहीं आ सकती।
