साइबर फ्रॉड बढ़ा: व्यापारियों और आम लोगों के बैंक खाते सीज़, पीड़ित बैंक–थाने–कोर्ट के चक्कर काटने को मजबूर

छत्तीसगढ़ सहित देश के कई राज्यों में हाल के महीनों में साइबर ठगी के मामलों में तेज़ी से बढ़ोतरी दर्ज की गई है। ऑनलाइन धोखाधड़ी से जुड़े मामलों में एक नया और चिंताजनक ट्रेंड उभरकर सामने आया है—ठगी से जुड़ी हुई रकम जैसे ही किसी खाते में आती है, पुलिस एवं साइबर सेल द्वारा उस खाते को तुरंत सीज़ कर दिया जाता है। इससे वास्तविक पीड़ित और निर्दोष लोग भी परेशानी में फंस रहे हैं, जिनके बैंक खाते बिना किसी पूर्व सूचना के फ्रीज़ कर दिए जाते हैं।

इस कार्रवाई का उद्देश्य भले ही साइबर क्रिमिनल्स की धरपकड़ और ठगी की रकम को रोकना है, लेकिन इसका सीधा असर व्यापारियों, छोटे व्यवसायियों, छात्रों और आम लोगों पर पड़ रहा है। कई लोग अपनी मेहनत की कमाई तक नहीं निकाल पा रहे हैं और बैंक, थाने तथा कोर्ट के बीच लगातार चक्कर काटने को मजबूर हैं।

अचानक खाते सीज़ — व्यापारी और कर्मचारी सबसे अधिक प्रभावित

व्यापारियों ने बताया कि पिछले कुछ महीनों में कई ऐसे मामले सामने आए जहाँ उनके बिज़नेस अकाउंट में किसी अनजान व्यक्ति द्वारा गलती से या ठगी से प्राप्त राशि ट्रांसफर कर दी गई। जैसे ही यह राशि खाते में आई, बैंक ने खाते को तुरंत फ्रीज़ कर दिया और व्यापारी को बाद में फोन या मैसेज से इसकी सूचना मिली।

अकाउंट फ्रीज़ होने से:

  • दैनिक लेन-देन रुक जाता है

  • कर्मचारियों की सैलरी का भुगतान बाधित होता है

  • सप्लायर को पेमेंट नहीं जा पाता

  • GST, EMI, लोन की किश्तें समय पर कट नहीं पातीं

कई व्यापारियों ने बताया कि उन्होंने कई बार शिकायत करने के बावजूद कोई त्वरित समाधान नहीं मिला। उनका कहना है कि “हम ठगी करने वाले नहीं हैं, लेकिन किसी और के अपराध की वजह से हमारे खाते बंद हो रहे हैं।”

आम लोगों के लिए भी बड़ी समस्या — व्यक्तिगत खाते तक फ्रीज़

यह समस्या केवल व्यापारियों तक सीमित नहीं है। छात्रों, नौकरीपेशा लोगों, गृहणियों और ग्रामीण इलाकों के लोगों तक के खाते सीज़ किए जा रहे हैं। कई लोग यह समझ ही नहीं पाते कि उनके खाते पर रोक क्यों लग गई है।

अधिकतर मामलों में:

  • ठग किसी भी खाते को बतौर ‘म्यूल अकाउंट’ इस्तेमाल कर लेते हैं

  • पीड़ित को पता ही नहीं चलता कि कोई संदिग्ध लेन-देन उसके खाते से होकर गुज़रा

  • पुलिस साइबर शिकायत का रिकॉर्ड देखते ही संबंधित खाते को ब्लॉक कर देती है

लोग तब जाकर स्थिति समझ पाते हैं जब ATM काम नहीं करता, UPI पेमेंट फेल हो जाती है, या बैंक खाते की रकम निकालने में प्रतिबंध लग जाता है।

ठगी से जुड़ी रकम आते ही पुलिस की कार्रवाई तेज़

साइबर सेल का तर्क है कि ठगी में इस्तेमाल किए गए खातों को तुरंत सीज़ करना ज़रूरी है, ताकि रकम आगे न बढ़े और अपराधियों को पकड़ा जा सके। पुलिस के अनुसार:

  • हर दिन सैकड़ों साइबर शिकायतें आ रही हैं

  • ठग लगातार नए सिम कार्ड, फर्जी KYC और डिजिटल अकाउंट का उपयोग कर रहे हैं

  • एक रकम कई खातों से होते हुए आगे बढ़ाई जाती है

ऐसे में किसी भी संदिग्ध खाते को तुरंत रोकना अनिवार्य हो गया है। लेकिन इस प्रक्रिया में निर्दोष लोग भी झमेले में फँस रहे हैं, जो केवल अपने नियमित लेन-देन कर रहे होते हैं।

पीड़ितों के लिए सबसे मुश्किल: बैंक–थाने–कोर्ट के चक्कर

खाता फ्रीज़ होने के बाद व्यक्ति को अपनी निर्दोषता साबित करने के लिए कई स्तरों की प्रक्रिया पूरी करनी पड़ती है:

  1. बैंक से संपर्क

    • बैंक बताता है कि खाते पर ‘होल्ड’ पुलिस के निर्देश पर लगाया गया है।

    • बैंक किसी भी प्रकार की छूट स्वयं से नहीं दे सकता।

  2. थाने या साइबर सेल जाना

    • संबंधित अधिकारी से बात कर कारण जानना होता है।

    • यदि कोई साइबर शिकायत खाते से जुड़ी पाई जाती है, तो व्यक्ति को लिखित बयान देना होता है।

  3. जांच की प्रतीक्षा

    • जांच पूरी होने तक खाते पर रोक बनी रहती है।

    • कुछ मामलों में यह कई दिनों से लेकर कई हफ्तों तक चल जाता है।

  4. न्यायालय की प्रक्रिया (कुछ मामलों में)

    • यदि मामला लंबा हो, तो कोर्ट से अनफ्रीज़िंग ऑर्डर लेना पड़ सकता है।

इस पूरी प्रक्रिया के दौरान व्यक्ति का वित्तीय जीवन प्रभावित होता है। कई लोग बताते हैं कि ihnen EMI, मेडिकल खर्च, बच्चों की फीस और अन्य जरूरी भुगतान में भारी परेशानी झेलनी पड़ी।

फर्जी कॉल और फर्जी UPI रिक्वेस्ट — साइबर ठगी के नए हथकंडे

साइबर फ्रॉड के बढ़ने की मुख्य वजहें:

  • OLX, Quikr और Facebook मार्केटप्लेस पर फर्जी खरीदार

  • KYC अपडेट के नाम पर फर्जी बैंक अधिकारी

  • बिजली बिल जमा न होने का डर दिखाकर धमकी

  • QR कोड के नाम पर उल्टा पेमेंट कराने की तरकीब

  • WhatsApp पर विदेशी नंबर से चैट और निवेश का झांसा

  • नौकरी और पार्ट-टाइम वर्क के नाम पर ठगी

  • लॉटरी, इनाम, सरकारी सब्सिडी जैसे फर्जी मैसेज

ठग अक्सर ऐसे लेन-देन को किसी मासूम व्यक्ति के खाते से गुजारकर अपना लोकेशन और पहचान छिपाते हैं।

कानून विशेषज्ञों की राय

कानून विशेषज्ञों का कहना है कि:

  • पुलिस द्वारा त्वरित कार्रवाई आवश्यक है

  • लेकिन निर्दोष व्यक्तियों के आर्थिक अधिकार प्रभावित नहीं होने चाहिए

  • खाते फ्रीज़ करने से पहले बैंक और पुलिस को बेहतर वेरिफिकेशन मैकेनिज़्म अपनाना चाहिए

कई कानूनी विशेषज्ञ यह भी कहते हैं कि वित्तीय फ्रीडम से जुड़ी समस्याएं नागरिक के मौलिक अधिकारों से जुड़ी हो सकती हैं, इसलिए अनचाही देरी सुधार की माँग को जन्म देती है।

सरकारी और बैंक स्तर पर आवश्यक सुधार

इस समस्या को कम करने के लिए सुझाए गए कदम:

  • खाते फ्रीज़ करने की स्पष्ट और पारदर्शी SOP जारी हो

  • संदिग्ध लेन-देन पर पहले ग्राहक से वेरिफिकेशन

  • म्यूल अकाउंट की पहचान के लिए AI-आधारित मॉनिटरिंग

  • पीड़ितों के लिए तेज़ ‘सिंगल विंडो’ समाधान

  • छोटे लेन-देन के मामलों में त्वरित राहत

यदि ये सुधार लागू होते हैं तो साइबर अपराध पर अधिक प्रभावी रोक लगेगी और निर्दोष नागरिकों को अनावश्यक परेशानी नहीं होगी।

निष्कर्ष: बढ़ते साइबर फ्रॉड के बीच सावधानी ही बचाव

साइबर फ्रॉड तेजी से बढ़ रहा है और अपराधियों के तरीके लगातार बदल रहे हैं। खाते फ्रीज़ होना एक गंभीर समस्या बन गई है, जो आम लोगों के लिए आर्थिक संकट का कारण बन रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि जागरूकता, बेहतर सिस्टम और संतुलित पुलिस कार्रवाई ही इसका समाधान है।