रिक्शा चलाने वाले सौहेल ने किया NEET एग्जाम क्रैक ,आर्थिक तंगी और तमाम मुश्किलों के बावजूद हासिल किए 552 मार्क्स

मुज़फ्फरनगर के रहने वाले मोहम्मद सौहेल ने अपने संघर्ष और संकल्प से यह साबित कर दिया कि सपनों को सच करने के लिए हालात नहीं, हौसले मायने रखते हैं। साल 2021 में उन्होंने अपने भाई के साथ 12वीं पास की थी। लेकिन आर्थिक तंगी के कारण केवल उनके भाई को कॉलेज भेजा गया। सौहेल ने पढ़ाई छोड़ दी और पिता के ई-रिक्शा को चलाकर घर की जिम्मेदारी उठाई।

आज वही सौहेल NEET UG 2025 में 720 में से 552 अंक लाकर डॉक्टर बनने की राह पर हैं। पिछले साल भी उन्होंने 600 से ज्यादा अंक लाए थे, लेकिन सीट नहीं मिली। इस बार उम्मीद है कि उन्हें अच्छे मेडिकल कॉलेज में दाखिला मिलेगा।

उनके परिवार में मां-पिता और दो भाई हैं। पढ़ाई का माहौल कभी नहीं रहा। यहां तक कि उनके भाई ने भी कॉलेज बीच में छोड़ दिया। सौहेल की मां चाहती थीं कि बेटा पढ़-लिखकर डॉक्टर बने। सौहेल ने मां का सपना अपना बना लिया।

ई-रिक्शा चलाते वक्त सहना पड़ा तिरस्कार
रिक्शा चलाते हुए सौहेल कई बार लोगों की बदसलूकी का शिकार हुए। एक बार रिक्शा पीछे की बाइक से टकरा गया, तो बाइक वाला गुस्से में चाबी निकाल कर खड़ा हो गया और मरम्मत का खर्च सौहेल पर डाल दिया। सुबह से रिक्शा चलाकर जो 200-250 रुपए कमाए थे, वो सब खर्च हो गए। उस दिन उन्हें अहसास हुआ कि हालात से लड़ना कितना जरूरी है।

हिंदी मीडियम से पढ़ाई, अंग्रेजी में परीक्षा की तैयारी
सौहेल ने पहली से 12वीं तक पढ़ाई हिंदी माध्यम से की थी, लेकिन NEET की तैयारी पूरी तरह अंग्रेजी में करनी पड़ी। कोचिंग की मोटी फीस वह नहीं दे सकते थे, इसलिए स्कूल टीचर्स से मदद ली और फिर सस्ती ऑनलाइन कोचिंग से पढ़ाई शुरू की। PW ऐप से पढ़ाई की और त्योहारों में बैच खरीदकर टेस्ट देना शुरू किया।

टाइम टेबल नहीं, टॉपिक खत्म करने का नियम
सौहेल के लिए पढ़ाई का कोई तय शेड्यूल नहीं था। वो रिक्शा चलाने के बाद शाम को पढ़ने बैठते और तब तक नहीं उठते जब तक पूरा टॉपिक खत्म न हो जाए। उनका मानना है कि टाइम टेबल आपको बाँध देता है, जबकि पढ़ाई में लय और आत्म-निष्ठा जरूरी है।

“MBBS करना है, तो करना ही है”
सौहेल कहते हैं, “मम्मी चाहती थीं कि डॉक्टर बनूं, लेकिन उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि MBBS डॉक्टर बन सकता हूं। जब मुझे NEET के बारे में पता चला, तभी ठान लिया कि अगर बनना है तो MBBS डॉक्टर ही बनूंगा।”

दूसरों को सलाह
सौहेल उन छात्रों से कहते हैं जो कठिनाइयों से जूझ रहे हैं:
“गांव से हो या गरीब परिवार से, पहले एक प्रयास जरूर करो। अगर अंदर से आवाज आ रही है कि कर सकते हो, तो किसी की मत सुनो। अपने लक्ष्य पर अडिग रहो, फिर हालात कैसे भी हों, रास्ता मिल ही जाएगा।”

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