रीवा जिले में बिजली व्यवस्था को मिलेगा मजबूती का सहारा, 7 सबस्टेशनों में 108 एमवीएआर क्षमता के 9 कैपेसिटर बैंक संचालित

रीवा। मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी (एमपी ट्रांसको) रीवा जिले में विद्युत पारेषण व्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में काम कर रही है। जिले के 7 एक्स्ट्रा हाई टेंशन (ईएचवी) सबस्टेशनों में 108 एमवीएआर क्षमता के 9 कैपेसिटर बैंक संचालित हैं। इनसे बिजली के वोल्टेज को स्थिर बनाए रखने और उपभोक्ताओं तक गुणवत्तापूर्ण विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने में मदद मिल रही है।

7 सबस्टेशनों में कैपेसिटर बैंक की सुविधा

रीवा जिले में 220 केवी के सिरमौर और रीवा सबस्टेशन तथा 132 केवी के कटरा, मनगवां, रीवा, सगरा और अतरैला सबस्टेशन में ये कैपेसिटर बैंक स्थापित हैं। इनकी कुल क्षमता 108 एमवीएआर है। कैपेसिटर बैंक विद्युत प्रणाली को आवश्यक रिएक्टिव पावर उपलब्ध कराते हैं, जिससे वोल्टेज में होने वाले उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करने में सहायता मिलती है।

प्रदेश में 750 कैपेसिटर बैंक क्रियाशील

एमपी ट्रांसको ने वित्तीय वर्ष 2025-26 और चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 में अब तक 29 नए कैपेसिटर बैंक स्थापित कर ऊर्जीकृत किए हैं। वर्तमान में प्रदेश में कुल 750 कैपेसिटर बैंक क्रियाशील हैं, जिनकी संयुक्त स्थापित क्षमता 9,383.5 एमवीएआर है। यह प्रदेश की अब तक की अधिकतम रिएक्टिव पावर मांग 6,776 एमवीएआर से लगभग 38 प्रतिशत अधिक है।

प्रदेश के ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने कहा कि राज्य शासन की मंशा के अनुरूप उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण बिजली उपलब्ध कराने के लिए एमपी ट्रांसको अपने ईएचवी सबस्टेशनों में आवश्यकता के अनुसार कैपेसिटर बैंक स्थापित कर रही है। कंपनी के 418 सबस्टेशनों में से अधिकांश में विभिन्न क्षमताओं के कैपेसिटर बैंक संचालित हैं। पुराने सबस्टेशनों में भी जरूरत के अनुसार नए बैंक लगाए जा रहे हैं और मौजूदा बैंकों की क्षमता बढ़ाई जा रही है।

52 पुराने कैपेसिटर बैंकों को बदला गया

एमपी ट्रांसको के मुख्य अभियंता (टेस्टिंग) एम.वाई. मंसूरी ने बताया कि कंपनी ने 52 पुराने कैपेसिटर बैंकों को चिह्नित कर उनके स्थान पर अधिक क्षमता वाले नए बैंक स्थापित किए हैं। पुराने बैंक अपनी उपयोगी आयु पूरी कर चुके थे और अपेक्षित कैपेसिटिव सपोर्ट नहीं दे पा रहे थे। इनके प्रतिस्थापन से रिएक्टिव पावर कंपनसेशन क्षमता में अब तक 309 एमवीएआर की वृद्धि हुई है।

वोल्टेज स्थिरता और विद्युत दक्षता में सुधार

मंसूरी के अनुसार, सिंचाई पंप, औद्योगिक मोटरें और अन्य विद्युत उपकरण इंडक्टिव लोड उत्पन्न करते हैं। इससे वोल्टेज में गिरावट और पावर फैक्टर में कमी आ सकती है। कैपेसिटर बैंक आवश्यक रिएक्टिव पावर की भरपाई करके वोल्टेज प्रोफाइल सुधारने, पावर फैक्टर बेहतर बनाए रखने और पारेषण प्रणाली की दक्षता बढ़ाने में मदद करते हैं।

इस पहल से प्रदेश की विद्युत पारेषण व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने और उपभोक्ताओं को मानक वोल्टेज पर गुणवत्तापूर्ण बिजली उपलब्ध कराने में सहयोग मिल रहा है।

शशिकांत ओझा
जनसंपर्क अधिकारी
मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी
ऊर्जा विभाग, मध्यप्रदेश शासन