अंतरिक्ष से स्वदेश वापसी: भारतीय एस्ट्रोनॉट शुभांशु शुक्ला आज पृथ्वी पर लौटेंगे

कैलिफोर्निया | 15 जुलाई 2025
भारतीय वायुसेना के ग्रुप कैप्टन और अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला समेत चार एस्ट्रोनॉट आज दोपहर 3 बजे सफलतापूर्वक पृथ्वी पर वापसी करेंगे। 18 दिनों की ऐतिहासिक अंतरिक्ष यात्रा के बाद इनका स्पेसएक्स का ड्रैगन स्पेसक्राफ्ट कैलिफोर्निया तट के पास स्प्लैशडाउन करेगा।

रीएंट्री के दौरान कैप्सूल का तापमान 2,500°C तक पहुंचने की संभावना है। चारों एस्ट्रोनॉट्स ने 14 जुलाई शाम 4:45 बजे इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) से विदा ली थी। वापसी में वे 263 किलो से अधिक वैज्ञानिक उपकरण और डेटा लेकर आ रहे हैं।

🧪 18 दिन, 60 से ज्यादा प्रयोग – विज्ञान का नया अध्याय

शुभांशु ने इस मिशन में:

  • 60 से अधिक वैज्ञानिक प्रयोग किए, जिनमें भारत के 7 विशेष प्रोजेक्ट शामिल थे।

  • अंतरिक्ष में मेथी और मूंग के बीज उगाने, हड्डियों पर माइक्रोग्रैविटी के प्रभाव और माइक्रोएल्गी पर भी अध्ययन किया।

🇮🇳 भारत से जुड़ाव बना रहा… अंतरिक्ष से संवाद

  • 28 जून को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लाइव बातचीत में शुभांशु ने कहा – “अंतरिक्ष से भारत बहुत भव्य दिखता है।”

  • मजाकिया अंदाज़ में पीएम ने पूछा – “क्या गाजर का हलवा साथियों को खिलाया?”
    शुभांशु ने हँसते हुए कहा – “जी हाँ, सबने मिलकर खाया।”

  • 3, 4 और 8 जुलाई को उन्होंने तिरुवनंतपुरम, बेंगलुरु और लखनऊ के 500+ छात्रों से संवाद कर STEM शिक्षा को प्रोत्साहन दिया।

  • 6 जुलाई को ISRO प्रमुख डॉ. वी. नारायणन व अन्य अधिकारियों के साथ चर्चा की, जो गगनयान मिशन के लिए अहम मानी जा रही है।

📷 अंतरिक्ष से खींची अद्भुत पृथ्वी की तस्वीरें

ISS के कपोला मॉड्यूल (सात खिड़कियों वाला विशेष हिस्सा) से शुभांशु ने पृथ्वी की कई शानदार तस्वीरें भी लीं, जिन्हें जल्द सार्वजनिक किया जाएगा।

🚀 41 साल बाद अंतरिक्ष में भारतीय: गगनयान का रास्ता तैयार

शुभांशु शुक्ला ISS जाने वाले पहले और अंतरिक्ष में जाने वाले दूसरे भारतीय हैं।
1984 में राकेश शर्मा ने सोवियत मिशन में भाग लिया था। यह मिशन भारत के आगामी गगनयान मानव मिशन के लिए नींव रखता है, जिसकी लॉन्चिंग 2027 में संभावित है।

🤝 भारत, नासा, ISRO और स्पेसएक्स की साझेदारी में हुआ मिशन

  • शुभांशु Axiom-4 मिशन का हिस्सा हैं।

  • इस मिशन के लिए भारत ने 548 करोड़ रुपए का भुगतान किया है।

  • यह एक्सियम स्पेस, नासा, इसरो और स्पेसएक्स की संयुक्त पहल है।

🛰️ क्या है इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS)?

ISS एक विशाल अंतरिक्ष प्रयोगशाला है जो हर 90 मिनट में पृथ्वी की एक परिक्रमा करती है। इसमें पांच प्रमुख अंतरिक्ष एजेंसियों का योगदान है, और एस्ट्रोनॉट यहां माइक्रोग्रैविटी में प्रयोग करते हैं।

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