वेतन–पेंशन में जा रही 80% तक आय, विकास योजनाओं के लिए धन की कमी

देश के कई राज्यों पर बढ़ता कर्ज अब गंभीर आर्थिक चुनौती के रूप में सामने आ रहा है। हालिया वित्तीय आंकड़ों के अनुसार, अनेक राज्यों की कुल आय का 70 से 80 प्रतिशत हिस्सा केवल वेतन और पेंशन भुगतान में खर्च हो रहा है, जिससे विकास योजनाओं के लिए संसाधनों की भारी कमी उत्पन्न हो गई है।

📊 वित्तीय दबाव में राज्य सरकारें

राज्य सरकारों की आय का बड़ा हिस्सा राजस्व व्यय में फंस जाने से पूंजीगत खर्च प्रभावित हो रहा है। बुनियादी ढांचा, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार सृजन जैसी योजनाओं के लिए अपेक्षित बजट उपलब्ध नहीं हो पा रहा है।

💼 बढ़ते कर्ज की मजबूरी

विशेषज्ञों के अनुसार, आय और व्यय के इस असंतुलन के चलते राज्यों को कर्ज लेने पर निर्भर होना पड़ रहा है। लगातार बढ़ता कर्ज भविष्य में ब्याज बोझ बढ़ा सकता है, जिससे वित्तीय स्थिति और कमजोर होने की आशंका है।

🏗️ विकास योजनाओं पर असर

वेतन–पेंशन जैसे अनिवार्य खर्चों के बाद सीमित राशि बचने से नई विकास परियोजनाओं की गति धीमी पड़ रही है। कई राज्यों में योजनाओं के क्रियान्वयन में देरी और कटौती की स्थिति बन रही है।

🧾 समाधान की जरूरत

आर्थिक जानकारों का मानना है कि राज्यों को

  • राजस्व बढ़ाने,

  • अनुत्पादक खर्च नियंत्रित करने, और

  • वित्तीय सुधारों
    पर तत्काल ध्यान देना होगा, ताकि विकास और कल्याण योजनाओं की निरंतरता बनी रहे।

निष्कर्ष

राज्यों पर बढ़ता कर्ज केवल वित्तीय आंकड़ों की समस्या नहीं, बल्कि दीर्घकालिक विकास और आर्थिक स्थिरता से जुड़ा गंभीर मुद्दा है। यदि समय रहते संतुलन नहीं साधा गया, तो इसका सीधा असर जनकल्याण और विकास की रफ्तार पर पड़ेगा