नन गिरफ्तारी प्रकरण पर 9 दिनों में उभरे घटनाक्रम पर सार्वजनिक वक्तव्य

दिनांक 25 जुलाई 2025 को दुर्ग रेलवे स्टेशन पर मानव तस्करी और जबरन धर्मांतरण के संदेह में दो कैथोलिक ननों – सिस्टर प्रीति मैरी और सिस्टर वंदना फ्रांसिस, एवं एक युवती सुकमान मंडावी को पुलिस द्वारा हिरासत में लिया गया था। तीनों को दिल्ली ले जाने के क्रम में तीन अन्य आदिवासी युवतियों के साथ देखे जाने पर कार्यकर्ताओं द्वारा घेराबंदी कर गिरफ्तारी करवाई गई।

घटना के पश्चात् तीनों पीड़ितों द्वारा यह गंभीर आरोप लगाए गए कि उन्हें जबरन बयान बदलने के लिए शारीरिक व मानसिक दबाव डाला गया। इस विषय पर पीड़िता द्वारा दिए गए वीडियो बयान में कहा गया:

“हमें पीट-पीटकर बयान बदलने को मजबूर किया गया। सिस्टर हमारी मदद कर रही थीं, न कि हमें कहीं बेचने ले जा रही थीं।”

इस प्रकरण को लेकर दुर्ग से लेकर दिल्ली और केरल तक राजनीतिक व धार्मिक हलकों में तीव्र प्रतिक्रियाएं देखी गईं। अनेक संगठनों और चर्च नेतृत्व ने इस गिरफ़्तारी को धार्मिक स्वतंत्रता का उल्लंघन और भीड़-न्याय (Mob Justice) की संज्ञा दी।

प्रमुख घटनाक्रम – संक्षिप्त विवरण:

  • 25 जुलाई – ननों की गिरफ्तारी, मानव तस्करी का मामला दर्ज।

  • 29 जुलाई – पीड़ितों द्वारा बयान बदलवाने और मारपीट का आरोप।

  • 31 जुलाई – सेशन कोर्ट द्वारा जमानत याचिका खारिज, मामला NIA कोर्ट को सौंपा गया।

  • 2 अगस्त – विशेष NIA कोर्ट, बिलासपुर द्वारा सभी तीनों को जमानत प्रदान की गई।

इस घटना से देशभर में धार्मिक सहिष्णुता, आदिवासी अधिकारों, और कानून व्यवस्था पर गहन विमर्श शुरू हुआ है।

हम संबंधित जांच एजेंसियों से मांग करते हैं कि इस प्रकरण की निष्पक्ष और संवेदनशील जांच की जाए एवं किसी भी निर्दोष व्यक्ति को भीड़ या राजनीति के दबाव में अन्याय का शिकार न बनने दिया जाए।