पीएम मोदी का इजराइल दौरा: संसद को संबोधित करने की तैयारी, संभावित रक्षा समझौतों पर नजर

यरूशलम/नई दिल्ली से रिपोर्ट

प्रधानमंत्री Narendra Modi के संभावित इजराइल दौरे को लेकर कूटनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। सूत्रों के अनुसार, दौरे के दौरान पीएम मोदी इजराइल की संसद Knesset को संबोधित कर सकते हैं।

इसके साथ ही, दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग को और मजबूत करने के उद्देश्य से नए समझौतों पर चर्चा की अटकलें भी लगाई जा रही हैं।

संसद संबोधन का महत्व

यदि पीएम मोदी कनेसेट को संबोधित करते हैं, तो यह भारत–इजराइल संबंधों के लिहाज से एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक संकेत होगा।

  • रणनीतिक साझेदारी को सार्वजनिक रूप से रेखांकित करना
  • पश्चिम एशिया में भारत की संतुलित विदेश नीति को प्रदर्शित करना
  • तकनीक, रक्षा और कृषि सहयोग को विस्तार देना

भारत और इजराइल के बीच 2017 के बाद से उच्च-स्तरीय यात्राओं में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है।

रक्षा समझौतों पर अटकलें

भारत पहले से ही इजराइल से विभिन्न रक्षा प्रणालियाँ खरीदता रहा है, जिनमें ड्रोन, मिसाइल सिस्टम और निगरानी तकनीक शामिल हैं।

संभावित चर्चा के क्षेत्र:

  1. उन्नत ड्रोन टेक्नोलॉजी
  2. एयर डिफेंस सिस्टम
  3. साइबर सुरक्षा सहयोग
  4. संयुक्त अनुसंधान एवं निर्माण

विशेषज्ञों का मानना है कि ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत रक्षा उत्पादन में संयुक्त निवेश की संभावना भी तलाशी जा सकती है।

सामरिक और भू-राजनीतिक संदर्भ

पश्चिम एशिया में मौजूदा तनाव, विशेषकर इजराइल–हमास संघर्ष के बाद, भारत संतुलित कूटनीति की नीति अपना रहा है।

भारत ने पारंपरिक रूप से इजराइल के साथ रक्षा और तकनीकी सहयोग बढ़ाया है, जबकि फिलिस्तीन के मुद्दे पर भी समर्थन की नीति जारी रखी है।

इस दौरे को क्षेत्रीय स्थिरता, आतंकवाद-रोधी सहयोग और ऊर्जा सुरक्षा के संदर्भ में भी देखा जा रहा है।

आर्थिक और तकनीकी सहयोग

रक्षा के अलावा, दोनों देशों के बीच निम्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ सकता है:

  • कृषि तकनीक
  • जल प्रबंधन
  • स्टार्टअप इकोसिस्टम
  • आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस

इजराइल की हाई-टेक विशेषज्ञता और भारत का बड़ा बाजार—दोनों देशों के लिए रणनीतिक अवसर प्रस्तुत करते हैं।

राजनीतिक विश्लेषण

यह दौरा भारत की सक्रिय विदेश नीति और वैश्विक मंच पर बढ़ती भूमिका को रेखांकित कर सकता है।

संसद संबोधन और संभावित रक्षा समझौते न केवल द्विपक्षीय संबंधों को मजबूती देंगे, बल्कि क्षेत्रीय शक्ति संतुलन पर भी प्रभाव डाल सकते हैं।

निष्कर्ष

पीएम मोदी का संभावित इजराइल दौरा कूटनीतिक, रणनीतिक और रक्षा सहयोग के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

अब निगाहें इस बात पर होंगी कि क्या संसद संबोधन की पुष्टि होती है और किन ठोस समझौतों पर हस्ताक्षर होते हैं।

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