पाकिस्तान में राजनीतिक भूचाल: इमरान खान की रिहाई के लिए PTI का ‘लॉन्ग मार्च’ तेज; शहबाज शरीफ का वार्ता प्रस्ताव खारिज

इस्लामाबाद: पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की जेल से रिहाई की मांग को लेकर विपक्षी दल पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) का विरोध प्रदर्शन (लॉन्ग मार्च) उग्र रूप ले चुका है। खैबर पख्तूनख्वा के मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी की अगुवाई में 4 अक्टूबर को शुरू हुआ यह लॉन्ग मार्च पेशावर से आगे बढ़ते हुए राजधानी इस्लामाबाद की ओर तेजी से रुख कर रहा है।
राजनीतिक संकट के गहराने के बीच प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने प्रदर्शनकारियों को बातचीत का न्योता दिया था, जिसे इमरान समर्थकों ने सिरे से खारिज कर दिया है।
इस्लामाबाद की ओर विशाल जनसैलाब, राजधानी सील
PTI समर्थकों का एक विशाल जत्था बसों, ट्रकों, कारों, बाइकों और रिक्शा के जरिए आगे बढ़ रहा है। हाथों में ‘सफेद कपड़े’ और PTI के झंडे थामे हजारों कार्यकर्ता राजधानी इस्लामाबाद से अब लगभग 180 किलोमीटर की दूरी पर हैं।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम: प्रदर्शनकारियों को इस्लामाबाद में प्रवेश करने से रोकने के लिए मुख्य राजमार्गों और सड़कों पर बड़े-बड़े शिपिंग कंटेनरों को रखकर रास्तों को पूरी तरह सील कर दिया गया है।
सुरक्षा बलों की तैनाती: राजधानी और पंजाब प्रांत के सीमावर्ती इलाकों में भारी पुलिस बल और सुरक्षा एजेंसियों को मुस्तैद किया गया है।
पीएम शहबाज शरीफ का ऑफर खारिज, अर्थव्यवस्था पर दी चेतावनी
बढ़ते राजनीतिक दबाव के बीच प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने PTI नेतृत्व को बातचीत की पेशकश की। गौरतलब है कि इससे ठीक एक दिन पहले सरकार ने किसी भी तरह की वार्ता से साफ इनकार कर दिया था।
PTI का रुख: इमरान समर्थकों ने सरकार के इस प्रस्ताव को ठुकराते हुए स्पष्ट किया कि जब तक इमरान खान को रिहा नहीं किया जाता, तब तक कोई समझौता नहीं होगा।
अर्थव्यवस्था पर खतरा: शहबाज शरीफ ने देश को संबोधित करते हुए कहा कि इस तरह के लंबे प्रदर्शनों से बीते ढाई सालों में स्थिर हुई देश की अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान पहुँचेगा। उन्होंने चेतावनी दी कि स्थिति नियंत्रित करने के लिए सरकार कानून के तहत कठोर कदम उठाएगी।
राजनीतिक विश्लेषण: क्या खतरे में है शहबाज सरकार की कुर्सी?
राजनीतिक विश्लेषकों और जानकारों के अनुसार, यह आंदोलन शहबाज सरकार के अस्तित्व के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है:
पंजाब में प्रवेश का दबाव: यदि यह लॉन्ग मार्च पंजाब प्रांत में दाखिल होने में सफल रहता है, तो केंद्र सरकार पर भारी दबाव बनेगा।
सैन्य नेतृत्व की भूमिका: विशेषज्ञों का मानना है कि सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर इस पूरे घटनाक्रम के जरिए शहबाज शरीफ को एक कमजोर प्रधानमंत्री के रूप में देख रहे हैं, जिससे भविष्य में सत्ता परिवर्तन या राजनीतिक पुनर्गठन के रास्ते खुल सकते हैं।
जेल में बंद हैं इमरान खान और उनका परिवार
73 वर्षीय इमरान खान अगस्त 2023 से रावलपिंडी की हाई-सिक्योरिटी अडियाला जेल में बंद हैं। उनके खिलाफ 100 से अधिक मामले दर्ज हैं:
सजाएं: अल-कादिर ट्रस्ट केस में 14 साल, सीक्रेट डॉक्यूमेंट लीक (साइफर केस) में 10 साल और तोशाखाना मामले में 3 साल की सजा सुनाई जा चुकी है।
परिवार पर कार्रवाई: तोशाखाना केस में उनकी पत्नी बुशरा बीबी भी जेल में हैं। वहीं सितंबर में उनकी तीनों बहनों—अलीमा, उजमा और नूरीन को भी हिरासत में लिया गया था।
वार्ता विफल होने की मुख्य वजहें
सरकार और PTI के बीच दो दौर की बातचीत बेनतीजा रहने के पीछे निम्नलिखित मुख्य बिंदु रहे हैं:
PTI की मांगें: इमरान खान से उनके निजी डॉक्टरों की टीम को तुरंत मिलने दिया जाए और उनकी स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए उन्हें किसी उच्च स्तरीय अस्पताल में स्थानांतरित किया जाए।
सरकार की शर्त: सरकार का कहना था कि मेडिकल सहायता या किसी भी राहत से पहले PTI को अपना ‘लॉन्ग मार्च’ और विरोध प्रदर्शन तुरंत रद्द करना होगा, जिसे विपक्षी दल ने स्वीकार नहीं किया।

