नर्सिंग कॉलेजों में 50% सीटें खाली, विभाग बोला—अदिवासी स्टेट होने से हाई परसेंटाइल मुश्किल; जीरो परसेंटाइल एडमिशन की मांग तेज

राज्य के नर्सिंग कॉलेजों में इस सत्र भारी पैमाने पर सीटें खाली रह गई हैं। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, लगभग 50 प्रतिशत सीटों पर अब तक दाखिले नहीं हो पाए, जिससे संस्थानों में चिंता बढ़ गई है। कॉलेज प्रबंधन का कहना है कि यह स्थिति लगातार दूसरे वर्ष सामने आई है और इसका सीधा प्रभाव स्वास्थ्य शिक्षा व्यवस्था पर पड़ रहा है।

विभागीय अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि राज्य के आदिवासी बहुल होने के कारण छात्रों के लिए उच्च परसेंटाइल क्रैक करना चुनौतीपूर्ण हो जाता है। राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षा में कट-ऑफ काफी ऊंची होने के कारण बड़ी संख्या में योग्य लेकिन कम परसेंटाइल वाले विद्यार्थी प्रवेश प्रक्रिया से बाहर हो गए हैं।

कई नर्सिंग कॉलेजों और निजी संस्थानों ने इस पर आपत्ति जताते हुए सरकार से जीरो परसेंटाइल एडमिशन लागू करने की मांग की है। उनका कहना है कि इससे अधिक छात्रों को अवसर मिलेगा और राज्य में नर्सिंग मानव संसाधन की कमी भी दूर हो सकेगी।

संस्थानों का तर्क है कि अगर प्रवेश प्रक्रिया में ढील नहीं दी गई, तो आने वाले वर्षों में स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए प्रशिक्षित नर्सों की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है। विभाग ने मामले की समीक्षा शुरू कर दी है और संकेत दिए हैं कि आवश्यक होने पर नियमों में संशोधन पर विचार किया जाएगा।