NCERT ‘Judicial Corruption’ विवाद कक्षा 8 की सोशल साइंस किताब के चैप्टर पर देशभर में बहस

देश की स्कूली शिक्षा प्रणाली में एक बार फिर पाठ्यपुस्तक सामग्री को लेकर बहस छिड़ गई है। National Council of Educational Research and Training (NCERT) की कक्षा 8 की सोशल साइंस पुस्तक में शामिल “ज्यूडीशियल करप्शन” शीर्षक से संबंधित अध्याय पर विभिन्न संगठनों, अभिभावकों और शिक्षाविदों ने आपत्ति दर्ज कराई है।

विवाद का केंद्र यह है कि क्या इस स्तर के छात्रों के लिए न्यायपालिका में भ्रष्टाचार जैसे संवेदनशील विषय को शामिल करना उचित है, और यदि हां, तो उसे किस भाषा और संदर्भ में प्रस्तुत किया जाना चाहिए।

विवाद की पृष्ठभूमि

जानकारी के अनुसार, कक्षा 8 की सोशल साइंस पुस्तक में लोकतांत्रिक संस्थाओं की कार्यप्रणाली, उत्तरदायित्व और पारदर्शिता पर चर्चा के दौरान न्यायपालिका से जुड़े भ्रष्टाचार के मामलों का उल्लेख किया गया है। अध्याय में यह समझाने का प्रयास किया गया है कि:

  • लोकतंत्र में संस्थागत जवाबदेही क्यों आवश्यक है

  • न्यायपालिका की स्वतंत्रता का महत्व

  • भ्रष्टाचार के आरोपों का प्रभाव

  • नागरिकों की भूमिका और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा

हालांकि, कुछ समूहों का कहना है कि अध्याय की भाषा और उदाहरण छात्रों के लिए जटिल और विवादास्पद हैं।

क्या हैं प्रमुख आपत्तियां?

विभिन्न अभिभावक संगठनों और सामाजिक समूहों ने निम्न बिंदुओं पर चिंता जताई है:

  1. आयु उपयुक्तता (Age Appropriateness):
    कक्षा 8 के छात्रों के लिए विषय अत्यधिक संवेदनशील बताया जा रहा है।

  2. संस्थागत छवि पर प्रभाव:
    आलोचकों का तर्क है कि इससे न्यायपालिका जैसी संवैधानिक संस्था की छवि प्रभावित हो सकती है।

  3. संतुलित प्रस्तुति का प्रश्न:
    कुछ शिक्षाविदों का कहना है कि अध्याय में सकारात्मक सुधारात्मक तंत्र (जैसे निगरानी तंत्र, न्यायिक सुधार) पर अधिक विस्तार होना चाहिए।

समर्थकों का पक्ष

शिक्षा विशेषज्ञों और कुछ सामाजिक संगठनों ने अध्याय का समर्थन करते हुए कहा है कि:

  • लोकतांत्रिक शिक्षा में संस्थागत जवाबदेही की समझ आवश्यक है।

  • छात्रों को संविधान, संस्थाओं और पारदर्शिता के महत्व से अवगत कराना नागरिक शिक्षा का हिस्सा है।

  • आलोचनात्मक सोच (Critical Thinking) विकसित करने के लिए ऐसे विषय जरूरी हैं।

उनका तर्क है कि भ्रष्टाचार की चर्चा का अर्थ संस्था को बदनाम करना नहीं, बल्कि सुधार की प्रक्रिया को समझाना है।

NCERT का संभावित रुख

हालांकि आधिकारिक रूप से विस्तृत बयान सामने नहीं आया है, परंतु सूत्रों के अनुसार NCERT पाठ्यसामग्री को राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप “मूल्य आधारित नागरिक शिक्षा” के दृष्टिकोण से तैयार करता है।

संभव है कि विवाद को देखते हुए सामग्री की भाषा, संदर्भ या प्रस्तुति की समीक्षा की जाए।

शिक्षा जगत में व्यापक बहस

यह विवाद केवल एक अध्याय तक सीमित नहीं है, बल्कि व्यापक प्रश्न उठाता है:

  • क्या स्कूली शिक्षा में संस्थागत आलोचना को स्थान मिलना चाहिए?

  • संवैधानिक मूल्यों की शिक्षा किस आयु में शुरू होनी चाहिए?

  • आलोचनात्मक सोच और संस्थागत सम्मान के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए?

विशेषज्ञों का मानना है कि शिक्षा प्रणाली का उद्देश्य छात्रों को जागरूक, जिम्मेदार और संवैधानिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्ध नागरिक बनाना है।

निष्कर्ष

NCERT की कक्षा 8 की पुस्तक में “ज्यूडीशियल करप्शन” अध्याय को लेकर छिड़ा विवाद शिक्षा, संवैधानिक संस्थाओं और लोकतांत्रिक मूल्यों के बीच संतुलन की चुनौती को उजागर करता है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि पाठ्यपुस्तक की समीक्षा होती है या स्पष्टीकरण जारी किया जाता है।

फिलहाल, यह मुद्दा शिक्षा नीति और पाठ्यक्रम निर्माण पर राष्ट्रीय स्तर की चर्चा का विषय बन गया है।

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