टेक्नोलॉजी हब बनेगा नवा रायपुर: 108 करोड़ की लागत से बनेगा हाईटेक इलेक्ट्रॉनिक्स फैसिलिटी सेंटर

देश में 2017 में वस्तु एवं सेवा कर (GST) लागू होने के लगभग आठ साल बाद केंद्र सरकार ने करदाताओं की वर्षों पुरानी मांग को पूरा करते हुए जीएसटी अपीलेट ट्रिब्यूनल (GSTAT) का गठन सभी राज्यों में कर दिया है। इस पहल से छत्तीसगढ़ के हजारों करदाताओं को राहत मिलेगी, जिन्हें टैक्स विवादों के निपटारे के लिए हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट का रुख करना पड़ता था। छत्तीसगढ़ में बनने वाली जीएसटी अपीलेट ट्रिब्यूनल बेंच में एक ज्यूडिशियल चेयरमैन और दो टेक्निकल मेंबर्स होंगे। कोर्ट संभवतः नवा रायपुर में स्थापित किया जाएगा। जानकारी के अनुसार, इसमें बिजोय बिहारी महापात्र की नियुक्ति की संभावना है।

हर वर्ष राज्य में करीब 10,000 करदाताओं को नोटिस जारी होते हैं, जिनमें से 60 से 70 प्रतिशत मामलों का समाधान अपीलेट ट्रिब्यूनल में संभव है, लेकिन अब तक लगभग 25,000 ऐसे मामले हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट में लंबित हैं। अब इन मामलों को न्यायिक समाधान देने के लिए राज्य स्तर पर ट्रिब्यूनल की स्थापना की गई है। इससे पहले टैक्स संबंधी मामलों की अंतिम सुनवाई CESTAT जैसे संस्थानों में होती थी, जो सिर्फ महानगरों तक सीमित थे। GST लागू होने के बाद ऐसी कोई अपीलीय व्यवस्था नहीं थी, जिससे करदाताओं और विभागीय अधिकारियों दोनों को ही सीधे अदालतों का सहारा लेना पड़ता था। इस प्रक्रिया में समय, धन और श्रम की भारी बर्बादी होती थी। अब केंद्र सरकार द्वारा की गई नियुक्तियों में 1991 बैच के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी ए. वेनुप्रसाद और रिटायर्ड आईआरएस अधिकारी अनिल गुप्ता को GSTAT के टेक्निकल मेंबर बनाया गया है।

इसी बीच राज्य के लिए एक और महत्वपूर्ण परियोजना को हरी झंडी मिल गई है। नवा रायपुर में 108.42 करोड़ रुपए की लागत से एक अत्याधुनिक इलेक्ट्रॉनिक्स कॉमन फैसिलिटी सेंटर (CFC) की स्थापना की जाएगी। यह सेंटर इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण क्षेत्र में कार्यरत स्टार्टअप्स और उद्योगों को एक ही स्थान पर प्रोटोटाइपिंग, टेस्टिंग और टेक्नोलॉजिकल संसाधन उपलब्ध कराएगा। इस परियोजना को भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा EMC 2.0 योजना के अंतर्गत स्वीकृति दी गई है। इसमें केंद्र सरकार 75 करोड़ रुपए और राज्य सरकार 33.43 करोड़ रुपए की हिस्सेदारी निभाएगी।

नवा रायपुर स्थित इस फैसिलिटी सेंटर में प्रिंटेड सर्किट बोर्ड (PCB) प्रोटोटाइपिंग, 3D प्रिंटिंग, EMC परीक्षण, वुड वर्कशॉप, सेमीकंडक्टर टेक्नोलॉजी, LED निर्माण, सोलर चार्ज कंट्रोलर, इलेक्ट्रिक वाहन समाधान, ऑटोमेशन और SCADA पैनल निर्माण जैसी सुविधाएं एक ही छत के नीचे मिलेंगी। यह सेंटर छत्तीसगढ़ को बेंगलुरु, पुणे और नोएडा जैसे टेक्नोलॉजी हब्स की निर्भरता से मुक्त करेगा और स्थानीय स्तर पर रोजगार, नवाचार और स्टार्टअप्स को बढ़ावा देगा। उदाहरण के तौर पर LED यूनिट्स अपने उत्पादों की गुणवत्ता जांच के लिए सेंटर की लैब का उपयोग कर सकेंगी, जबकि सोलर कंट्रोलर डिजाइन करने वाले स्टार्टअप्स यहां अपने उत्पादों की प्रोटोटाइपिंग करवा पाएंगे।

इन दोनों बड़ी घोषणाओं से छत्तीसगढ़ को टैक्स न्याय और टेक्नोलॉजी नवाचार के क्षेत्र में नई पहचान मिलेगी और राज्य के विकास की गति को मजबूती मिलेगी।