रावतपुरा मेडिकल कॉलेज रिश्वत कांड में बड़ा खुलासा: ED को मिले डिजिटल सबूत; फर्जी पेशेंट, नकली फैकल्टी और मंत्रालय से जानकारी लीक होने का पर्दाफाश
रायपुर | Chhattisgarh
29 नवंबर 2025
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में रावतपुरा मेडिकल कॉलेज से जुड़े कथित रिश्वत और अनियमितताओं के बड़े घोटाले का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा की गई हालिया छापेमारी में एजेंसी ने कई महत्वपूर्ण डिजिटल सबूत जब्त किए हैं, जिनके आधार पर यह स्पष्ट होता है कि कॉलेज प्रबंधन ने चल रही जांच को प्रभावित करने और मेडिकल काउंसिल से मान्यता प्राप्त करने के लिए बड़े स्तर पर धोखाधड़ी, घूसखोरी और जालसाजी का सहारा लिया।
सूत्रों की मानें तो ED को मिली सामग्री में फर्जी पेशेंट भर्ती, नकली फैकल्टी बनाकर दस्तावेज तैयार करना, और मंत्रालय में बैठे कुछ अधिकारियों द्वारा संवेदनशील जानकारी लीक करने जैसी गंभीर बातें सामने आई हैं। यह मामला अब राज्य की सबसे हाई-प्रोफाइल स्वास्थ्य क्षेत्र की जांचों में शामिल हो चुका है।
मान्यता लेने के लिए ‘फर्जी पेशेंट भर्ती’ का खेल
ED को मिले दस्तावेजों में दिखाया गया है कि मेडिकल कॉलेज में मान्यता निरीक्षण के दौरान अस्पताल की क्षमता और मेडिकल सुविधाओं को ज्यादा दिखाने के लिए
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अस्पताल में अचानक बड़ी संख्या में फर्जी मरीज भर्ती किए गए,
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कुछ मरीजों के नाम और पते तक मौजूद नहीं हैं,
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कई पेशेंट ऐसे मिले, जिन्हें भर्ती दिखाया गया लेकिन वे अस्पताल में आए ही नहीं,
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अस्पताल की OPD व IPD संख्या बढ़ाने के लिए ‘स्टाफ द्वारा स्थानीय लोगों को एक-दो दिन के लिए भर्ती करने’ के ऑडियो-वीडियो साक्ष्य भी मिले हैं।
जांच टीम का कहना है कि यह तरीका उन मेडिकल संस्थानों द्वारा अक्सर अपनाया जाता है, जो मान्यता के नियमों पर खरे नहीं उतरते। लेकिन इस केस में यह गतिविधि संगठित तरीके से और भुगतान लेकर किए जाने के संकेत मिल रहे हैं।
नकली फैकल्टी बनाकर निरीक्षण को गुमराह किया गया
ED की रिपोर्ट का सबसे चौंकाने वाला हिस्सा है—फर्जी फैकल्टी का निर्माण।
डिजिटल सबूतों में यह पाया गया कि:
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कॉलेज प्रशासन ने बाहरी या पार्ट-टाइम डॉक्टरों को पूर्णकालिक फैकल्टी दिखाया,
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कुछ डॉक्टर्स का मेडिकल कॉलेज से कोई संबंध नहीं था, फिर भी उनके नाम-पते से डिजिटल अटेंडेंस तैयार की गई,
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निरीक्षण के दिन उपस्थित दिखाने हेतु बायोमेट्रिक डेटा में छेड़छाड़ के भी प्रमाण मिले हैं।
जांच अधिकारियों का कहना है कि यह सिर्फ अनियमितता नहीं बल्कि धोखाधड़ी (Fraud) और आपराधिक साजिश (Criminal Conspiracy) की श्रेणी में आता है।
मंत्रालय के अफसरों द्वारा जांच से संबंधित जानकारी लीक होने के सबूत
इस केस का सबसे गंभीर पहलू है — मंत्रालय स्तर से जानकारी लीक होना।
ED की जब्त की गई डिजिटल फाइलों में
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मंत्रालय के एक-दो अफसरों द्वारा
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निरीक्षण की तारीख,
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टीम की लिस्ट,
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आवश्यक कागजों की कॉपी,
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और जांच से संबंधित आंतरिक जानकारी
कॉलेज प्रबंधन तक पहले ही पहुंचा देने के सबूत मिले हैं।
यह लीक जानकारी कॉलेज के लिए ‘कोचिंग गाइडलाइन’ की तरह काम कर रही थी, जिससे वे पहले से तैयारी कर सकें और जांच टीम को गुमराह कर सकें।
इससे यह साफ है कि मामला केवल कॉलेज तक सीमित नहीं है, बल्कि सिस्टम में गहरी पैठ बनाए बैठे कुछ अधिकारियों की संलिप्तता भी सामने आ रही है।
441 करोड़ रुपए के संदिग्ध लेन-देन का कनेक्शन भी सामने आया
रावतपुरा मेडिकल कॉलेज मामले से जुड़े अन्य छापों में ED पहले ही 441 करोड़ रुपए के संदिग्ध ट्रांजेक्शन का खुलासा कर चुकी है।
नए सबूतों से यह भी संकेत मिले हैं कि:
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कॉलेज से जुड़े कुछ व्यक्तियों ने विदेशों में भी पैसे भेजे,
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इनमें ऑस्ट्रेलिया और चीन जैसे देशों में लेन-देन के डिजिटल रिकॉर्ड मिले हैं,
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पैसा मेडिकल कॉलेज के नाम पर आया और बाद में निजी खातों व शेल कंपनियों में पहुंचा।
यह संकेत देता है कि मेडिकल कॉलेज सिर्फ शिक्षा संस्थान नहीं, बल्कि बड़े आर्थिक लेन-देन का केंद्र बन चुका था।
ED अब किन धाराओं में कार्रवाई कर सकती है?
मिल रहे सबूतों के आधार पर ED नीचे दिए गए गंभीर अपराधों की जांच कर रही है:
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Prevention of Money Laundering Act (PMLA)
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Forgery (IPC 463–471)
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Cheating (420)
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Criminal Conspiracy (120B)
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Corruption Act के तहत रिश्वत से जुड़े प्रावधान
जांच टीम ने स्पष्ट किया है कि आने वाले दिनों में कई और बड़े चेहरे भी सामने आ सकते हैं, जिनमें सरकारी अधिकारी, मेडिकल संस्थान के पदाधिकारी और कुछ दलाल शामिल हो सकते हैं।
स्वास्थ्य शिक्षा प्रणाली पर उठे बड़े सवाल
इस बड़े खुलासे ने राज्य की मेडिकल शिक्षा और स्वास्थ्य निरीक्षण प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
विशेषज्ञों का कहना है:
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अगर किसी मेडिकल कॉलेज में फर्जी मरीज और नकली फैकल्टी दिखाकर मान्यता ली जाती है,
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तो वहां से पास होने वाले डॉक्टरों की योग्यता और प्रशिक्षण भी संदिग्ध हो जाता है।
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इसका सीधा असर जनता की स्वास्थ्य सुरक्षा पर पड़ता है।
छात्र संगठनों ने मांग की है कि इस मामले की पारदर्शी और निष्पक्ष जांच हो तथा दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए।
राजनीतिक हलचल भी तेज
मामले के सामने आते ही
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विपक्ष ने राज्य सरकार और मंत्रालय को कटघरे में खड़ा किया है,
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वहीं सत्ता पक्ष का कहना है कि जांच स्वतंत्र एजेंसी कर रही है और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।
राजनीतिक बयानबाजी के बीच यह केस अब राज्य का सबसे चर्चित भ्रष्टाचार मामला बन चुका है।
अगले चरण में क्या होगा?
ED आने वाले दिनों में:
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डिजिटल फोरेंसिक जांच पूरी करेगी,
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अधिकारियों और प्रबंधन के स्टेटमेंट रिकॉर्ड करेगी,
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बैंक खातों और विदेशी लेन-देन का विस्तृत ऑडिट करेगी,
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और संभव है कि कुछ गिरफ्तारियां भी जल्द हों।
जांच एजेंसी का कहना है कि यह मामला सिर्फ मेडिकल कॉलेज में अनियमितता का नहीं, बल्कि सिस्टमेटिक करप्शन और मनी लॉन्ड्रिंग का है।
निष्कर्ष
रावतपुरा मेडिकल कॉलेज रिश्वत केस ने यह दिखा दिया है कि जब शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में भ्रष्टाचार होता है,
तो उसका असर समाज के हर स्तर पर पड़ता है।
ED को मिले डिजिटल सबूत न सिर्फ इस मामले का दायरा बढ़ा रहे हैं, बल्कि यह भी साबित कर रहे हैं कि यह एक संगठित और गहराई से फैला हुआ भ्रष्टाचार नेटवर्क था।
आने वाले समय में जांच के और गहरे खुलासे हो सकते हैं, जो इस केस को भारत के बड़े मेडिकल घोटालों की सूची में शामिल कर देंगे।
