लोकसभा सीटें 850 करने का प्रस्ताव – अमित शाह ने विस्तार से बताया, दक्षिण vs उत्तर बहस तेज
नई दिल्ली
देश में लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव सामने आने के बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इस मुद्दे पर विस्तार से अपनी बात रखते हुए कहा कि जनसंख्या के आधार पर प्रतिनिधित्व को संतुलित करना जरूरी है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि आने वाले समय में परिसीमन (Delimitation) की प्रक्रिया के तहत सीटों का पुनर्निर्धारण किया जाएगा, जिससे तेजी से बढ़ती जनसंख्या वाले राज्यों को उचित प्रतिनिधित्व मिल सके।
क्या है पूरा मामला?
वर्तमान में लोकसभा में 543 सीटें हैं। प्रस्ताव के अनुसार, इन्हें बढ़ाकर 850 तक किया जा सकता है। यह बदलाव परिसीमन आयोग की सिफारिशों के आधार पर किया जाएगा, जो 2026 के बाद लागू होने की संभावना है।
दक्षिण vs उत्तर बहस क्यों?
इस प्रस्ताव के बाद दक्षिण भारत और उत्तर भारत के बीच राजनीतिक बहस तेज हो गई है। दक्षिणी राज्यों का कहना है कि उन्होंने जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर प्रदर्शन किया है, ऐसे में सीटों का वितरण केवल जनसंख्या के आधार पर करना उनके साथ अन्याय होगा।
वहीं, उत्तर भारत के राज्यों का तर्क है कि अधिक जनसंख्या वाले क्षेत्रों को अधिक प्रतिनिधित्व मिलना लोकतंत्र के मूल सिद्धांतों के अनुरूप है।
अमित शाह का बयान
अमित शाह ने कहा कि यह प्रक्रिया पूरी तरह संवैधानिक और पारदर्शी होगी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि किसी भी राज्य के साथ भेदभाव नहीं किया जाएगा और सभी पक्षों को ध्यान में रखकर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
आगे क्या?
विशेषज्ञों का मानना है कि यह मुद्दा आने वाले चुनावों में बड़ा राजनीतिक विषय बन सकता है। परिसीमन के बाद देश की राजनीतिक संरचना में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
यह प्रस्ताव न केवल संसद की संरचना को प्रभावित करेगा, बल्कि केंद्र और राज्यों के बीच शक्ति संतुलन को भी नई दिशा दे सकता है।
