वन-टाइम सेटलमेंट की दिशा में पहल: 73 करोड़ के वित्तीय बोझ से जूझ रहा निशक्तजन निगम, केंद्र से तीन वर्षों से नहीं हुआ फंड रिलीज़

निशक्तजन निगम की वित्तीय स्थिति पर गंभीर दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। संस्था वर्तमान में लगभग 73 करोड़ रुपये के संचयी कर्ज के बोझ तले संचालित हो रही है, जिसके चलते operational sustainability और service delivery दोनों पर निर्णायक प्रभाव पड़ रहा है। इस परिदृश्य को देखते हुए निगम ने अब वन-टाइम सेटलमेंट (OTS) मॉडल को एक संभावित समाधान के तौर पर प्राथमिकता में लिया है, ताकि वित्तीय ढांचे को पुनर्गठित किया जा सके।

प्रशासनिक इनपुट के अनुसार, निगम को केंद्र सरकार से मिलने वाली grant-based financial assistance पिछले तीन वर्षों से लंबित है। फंड रिलीज़ न होने के कारण कई प्रमुख परियोजनाएँ, beneficiary payment cycles और procurement activities प्रभावित हुई हैं, जिसके चलते संस्था के cashflow architecture पर तीव्र दबाव उत्पन्न हो गया है।

विश्लेषकों का मानना है कि समय पर केंद्रीय सहायता न मिलने से निगम की liabilities का आकार बढ़ा, जबकि revenue-side inflow स्थिर रहने से working capital gap और अधिक चौड़ा हो गया। इस वजह से debt-servicing obligations को मैनेज करना चुनौतीपूर्ण हो गया है।

OTS मॉडल को अपनाने की दिशा में की जा रही पहल का उद्देश्य outstanding loans को rationalize करना, वित्तीय जोखिम कम करना और संस्था की लंबे समय की viability को restore करना है। यदि यह प्रक्रिया समयबद्ध रूप से आगे बढ़ती है, तो निगम अपनी core rehabilitation और support सेवाओं पर पुनः फोकस कर पाएगा।

राज्य स्तर पर भी इस मुद्दे को लेकर उच्च-स्तरीय परामर्श सक्रिय हो रहा है, ताकि फंडिंग bottlenecks दूर किए जा सकें और संस्था को एक sustainable financial framework प्रदान किया जा सके।