भारत और इटली ने आतंकवाद के वित्तपोषण के खिलाफ संयुक्त पहल की घोषणा: PM मोदी और मेलोनी की बैठक में बड़ा समझौता

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इटली की प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी की द्विपक्षीय बैठक के दौरान दोनों देशों ने आतंकवाद के वित्तपोषण के खिलाफ सहयोग को मजबूत करने के लिए एक नई संयुक्त पहल की घोषणा की है। यह पहल वैश्विक स्तर पर बढ़ते संगठित आतंकवाद और उसके फंडिंग नेटवर्क को रोकने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

आतंकवादी फंडिंग रोकने पर रणनीतिक सहयोग

बैठक के दौरान भारत और इटली ने आतंकवादी संगठनों के वित्तपोषण, मनी लॉन्ड्रिंग, हवाला चैन और अवैध लेनदेन पर संयुक्त रूप से निगरानी और कार्रवाई की आवश्यकता पर सहमति जताई।
दोनों देशों ने कहा कि वैश्विक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आर्थिक स्रोतों पर प्रहार करना सबसे प्रभावी तरीका है।

नई पहल के तहत:

  • फाइनेंशियल इंटेलिजेंस साझा करना,

  • आतंकवाद से जुड़े संदिग्ध लेनदेन की संयुक्त ट्रैकिंग,

  • आतंकवादी समूहों की क्रॉस-बॉर्डर फंडिंग पर निगरानी,

  • और संबंधित एजेंसियों के बीच टेक्नोलॉजी आधारित सहयोग
    को बढ़ावा दिया जाएगा।

PM मोदी और मेलोनी की गर्मजोशी भरी मुलाकात

बैठक में दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों को और गहरा करने की प्रतिबद्धता जताई। व्यापार, रक्षा, डिजिटल टेक्नोलॉजी, ऊर्जा सुरक्षा और इंडो-पैसिफिक रणनीति पर भी विस्तृत बातचीत हुई।

जियोर्जिया मेलोनी ने कहा कि भारत वैश्विक शांति और स्थिरता का प्रमुख स्तंभ है, और इटली आतंकवाद विरोधी लड़ाई में भारत का भरोसेमंद साझेदार बना रहेगा।

वैश्विक आतंकवाद पर भारत का कड़ा रुख

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आतंकवाद का कोई औचित्य नहीं हो सकता और इसकी फंडिंग रोकना अंतरराष्ट्रीय समुदाय की साझा जिम्मेदारी है। उन्होंने यह भी बताया कि भारत लंबे समय से आतंकवादी नेटवर्क के खिलाफ सख्त अभियान चला रहा है और इस लड़ाई में वैश्विक सहयोग बेहद जरूरी है।

अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी बढ़ेगा तालमेल

भारत और इटली ने FATF, G20 और संयुक्त राष्ट्र में भी इस मुद्दे पर तालमेल बढ़ाने पर सहमति जताई। दोनों देश आतंकवाद को राजनीतिक संरक्षण देने वाले देशों के खिलाफ कड़े कदम उठाने की मांग पर एकमत हैं।

कूटनीतिक संबंध हुए और मजबूत

विशेषज्ञों का कहना है कि यह संयुक्त पहल न केवल सुरक्षा सहयोग को बढ़ाएगी, बल्कि भारत-इटली संबंधों को भी नई दिशा देगी। दोनों देशों के बीच आर्थिक और भू-राजनीतिक साझेदारी पिछले कुछ वर्षों में तेजी से मजबूत हुई है।