इंदौर में भीख से बन रही कमाई का खुलासा: महिला के पास मिले ₹45,000, रेस्क्यू अभियान में जुटा प्रशासन
इंदौर शहर में भिक्षावृत्ति अब केवल जरूरत का साधन नहीं, बल्कि आय का जरिया बन चुकी है। गुरुवार को महिला बाल विकास अधिकारी की टीम ने एमजी रोड पर मस्जिद के पास एक महिला को भीख मांगते हुए पकड़ा। जांच में महिला के बैग से 40 पर्स और उनमें कुल ₹45,000 नकद मिले।
आंध्र प्रदेश से आया भिक्षुक, ₹20,000 नकद बरामद
एक अन्य मामले में, अधिकारियों ने एक व्यक्ति को रेस्क्यू किया, जो आंध्र प्रदेश से इंदौर आया था। उसके पास ₹20,000 नकद और रेल रिजर्वेशन टिकट मिले। जांच में पता चला कि वह ट्रेन में आरक्षित सीट पर सफर करके इंदौर पहुंचा था। इसके पास रेलवे का पास भी बरामद हुआ।
भिक्षावृत्ति पर प्रशासन का सख्त रुख
इंदौर में कलेक्टर ने भिक्षावृत्ति को रोकने के लिए कड़ा कदम उठाते हुए घोषणा की है कि भीख मांगने और देने वाले दोनों पर एफआईआर दर्ज की जाएगी।
300 से अधिक भिखारी सेवा धाम भेजे गए
महिला बाल विकास विभाग द्वारा चलाए जा रहे भिक्षुक मुक्त अभियान के तहत अब तक 300 से अधिक भिखारियों को उज्जैन के सेवा धाम में भेजा जा चुका है। यह अभियान शहर को भिक्षावृत्ति मुक्त बनाने की दिशा में एक सशक्त कदम है।
भीख के पीछे छिपी असलियत
यह घटनाएं इंदौर में भिक्षावृत्ति के पेशेवर स्वरूप को उजागर करती हैं, जहां कुछ लोग इसे आय का जरिया बना चुके हैं। प्रशासन अब इस प्रवृत्ति पर रोक लगाने और शहर को भिक्षुक मुक्त बनाने के लिए पूरी तरह से सक्रिय है।
