“यमन में मौत की सजा का सामना कर रही भारतीय नर्स निमिषा प्रिया की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी”
केरल की नर्स निमिषा प्रिया को यमन में 16 जुलाई को फांसी दी जानी है। इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को सुनवाई हुई। कोर्ट ने कहा कि मामला बेहद संवेदनशील है और अगर भारत की नागरिक यमन में मारी जाती है, तो यह दुखद होगा।
सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से बताया गया कि भारत अपनी ओर से हरसंभव प्रयास कर चुका है, लेकिन यमन जैसे देश में खुलकर कूटनीतिक दखल देना संभव नहीं है।
निमिषा पर आरोप है कि उन्होंने 2017 में यमन के नागरिक तलाल अब्दो महदी की हत्या कर दी थी। कोर्ट में याचिका दायर करने वाले संगठन ने बताया कि निमिषा का परिवार मृतक के परिवार से संपर्क में है और सुलह की कोशिश की जा रही है।
इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा—”हम ऐसा कोई आदेश कैसे दे सकते हैं? विदेश में हमारे आदेश को कौन मानेगा?”
🔍 निमिषा प्रिया और हत्या के मामले की पृष्ठभूमि:
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2008 में 19 वर्षीय निमिषा नर्स की नौकरी के लिए यमन गईं।
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2011 में शादी के बाद पति के साथ यमन लौटीं और बेटी हुई।
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पति और बेटी भारत लौट आए, निमिषा वहीं रह गईं और क्लिनिक शुरू किया।
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क्लिनिक शुरू करने के लिए लोकल पार्टनर की ज़रूरत थी, जहां उनकी मुलाकात महदी से हुई।
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महदी ने धोखे से निमिषा की शादी की फोटो में छेड़छाड़ कर उन्हें पत्नी बताया और उत्पीड़न शुरू कर दिया।
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महदी ने उनका पासपोर्ट जब्त कर लिया और शारीरिक व मानसिक उत्पीड़न करने लगा।
🩸 हत्या और सजा:
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जुलाई 2017 में पासपोर्ट वापस पाने के प्रयास में निमिषा ने महदी को बेहोशी की दवा दी, जिससे उसकी मौत हो गई।
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आरोप है कि निमिषा ने महदी के शव के टुकड़े कर वाटर टैंक में फेंक दिए।
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उन्हें यमन की अदालत ने मौत की सजा सुनाई, जिसे सुप्रीम कोर्ट और राष्ट्रपति दोनों ने बरकरार रखा।
💰 ब्लड मनी के जरिए बचाव की कोशिश:
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इस्लामी कानून के तहत, पीड़ित का परिवार पैसे लेकर दोषी को माफ कर सकता है, जिसे ‘ब्लड मनी’ कहते हैं।
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निमिषा की मां ने संपत्ति बेचकर और भीड़ निधि (क्राउडफंडिंग) से पैसे जुटाने की कोशिश की।
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एक व्यवसायी ने 1 करोड़ देने का ऐलान भी किया।
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फिलहाल मृतक के परिवार ने ब्लड मनी स्वीकार नहीं की है।
