भूपेश बघेल और बेटे चैतन्य की जमानत याचिकाओं पर आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई
छत्तीसगढ़ में बहुचर्चित शराब, कोयला घोटाला और महादेव सट्टा ऐप मामले की जांच के घेरे में अब पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल भी आ चुके हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ED), आर्थिक अपराध शाखा (EOW) और केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) इन मामलों की जांच कर रही हैं। गिरफ्तारी की आशंका के बीच बघेल ने सुप्रीम कोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दायर की है, जिस पर आज सोमवार को सुनवाई होगी।
यह सुनवाई सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉय-माल्या बागची की बेंच में होनी है। भूपेश बघेल ने दो अलग-अलग याचिकाएं दाखिल की हैं — एक ED और उसके उप निदेशक के खिलाफ, जबकि दूसरी CBI, छत्तीसगढ़ सरकार और उत्तर प्रदेश राज्य के खिलाफ है।
चैतन्य बघेल की रिमांड आज खत्म, जमानत याचिका पर भी सुनवाई
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल, जो शराब घोटाले में जेल में हैं, उन्होंने भी सुप्रीम कोर्ट में अग्रिम जमानत और ED की गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली याचिका लगाई है। उनकी याचिका पर भी आज ही सुनवाई होनी है।
चैतन्य बघेल की 14 दिन की न्यायिक हिरासत आज समाप्त हो रही है, जिसके बाद उन्हें रायपुर की विशेष अदालत में पेश किया जाएगा। ED उनकी रिमांड बढ़ाने की मांग कर सकती है।
राजनीतिक साजिश का आरोप
भूपेश बघेल ने अपनी याचिका में आरोप लगाया है कि जैसे उनके बेटे चैतन्य को राजनीतिक द्वेष के तहत गिरफ्तार किया गया, वैसे ही उन्हें भी निशाना बनाया जा सकता है। उन्होंने इसे बदले की भावना से की गई कार्रवाई बताया।
ED की छापेमारी और आरोप
करीब पांच महीने पहले शराब घोटाले में ED ने पूर्व मुख्यमंत्री के भिलाई स्थित आवास पर छापेमारी की थी। इस दौरान 32-33 लाख रुपये नकद और दस्तावेज जब्त किए गए थे। इस दौरान बघेल के बेटे चैतन्य से जुड़े 14 ठिकानों पर भी कार्रवाई की गई थी। आरोप है कि 2100 करोड़ रुपये के घोटाले में चैतन्य को भी लाभ पहुंचाया गया।
घोटाले से जुड़े आरोप और कड़ियां
ED के अनुसार:
-
शराब कारोबारी लक्ष्मीनारायण बंसल उर्फ पप्पू ने चैतन्य बघेल के साथ मिलकर 1000 करोड़ से अधिक रकम हैंडल करने की बात मानी है।
-
इस रकम में से 100 करोड़ नकद के.के. श्रीवास्तव को दिए गए थे।
-
ED ने दावा किया कि शराब घोटाले से पप्पू बंसल को केवल 3 महीने में 136 करोड़ रुपए मिले।
घोटाले की रकम से प्रोजेक्ट फंडिंग का आरोप
ED ने आरोप लगाया है कि चैतन्य बघेल के “विठ्ठल ग्रीन प्रोजेक्ट” में घोटाले की रकम का निवेश किया गया। रिकॉर्ड के अनुसार इस प्रोजेक्ट का खर्च 13-15 करोड़ था, लेकिन दस्तावेजों में सिर्फ 7.14 करोड़ दिखाया गया।
फर्जी खरीदारी और नकद लेन-देन का आरोप
-
त्रिलोक सिंह ढिल्लन ने 19 फ्लैट अपने कर्मचारियों के नाम पर खरीदे, जबकि पेमेंट खुद ने किया।
-
एक ज्वेलर्स ने चैतन्य को 5 करोड़ रुपये नकद लोन दिया, जिसे प्लॉट खरीदी के जरिए वैध दिखाया गया।
ED का आरोप है कि चैतन्य ने कई फ्रंट कंपनियों और व्यक्तियों के जरिए पैसों को घुमाया, ताकि कैश को वैध बनाया जा सके।
शराब घोटाले में किस-किस के नाम आए सामने?
ED की जांच के अनुसार, तत्कालीन सरकार के कार्यकाल में IAS अफसर अनिल टुटेजा, आबकारी विभाग के एमडी ए.पी. त्रिपाठी और कारोबारी अनवर ढेबर के गठजोड़ से घोटाले को अंजाम दिया गया। FIR में 2000 करोड़ से ज्यादा के घोटाले का अनुमान लगाया गया है।
