500 करोड़ के फर्जी प्रोजेक्ट का झांसा देकर 15 करोड़ की ठगी: भूपेश बघेल के करीबी केके श्रीवास्तव रिमांड पर, SIT और ED की पूछताछ जारी
तेलीबांधा पुलिस ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के करीबी माने जाने वाले केके श्रीवास्तव को 15 करोड़ की ठगी के मामले में 1 जुलाई तक रिमांड पर लिया है। आरोप है कि श्रीवास्तव ने दिल्ली के एक कारोबारी को स्मार्ट सिटी और नवा रायपुर (NRDA) के तहत 500 करोड़ के फर्जी प्रोजेक्ट का झांसा देकर करोड़ों की ठगी की। पुलिस ने उसे भोपाल से हुलिया बदलकर रहते हुए गिरफ्तार किया था।
300 करोड़ के ट्रांजेक्शन का खुलासा, बीपीएल खातों का इस्तेमाल
जांच के दौरान केके श्रीवास्तव के बैंक खातों और उसके घर से 300 करोड़ रुपए के लेन-देन के प्रमाण मिले हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि इन लेनदेन के लिए गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वालों के बैंक खातों का इस्तेमाल किया गया है। इन पैसों को फिलहाल “ऋण” के रूप में दिखाया गया है, जिसे लेकर SIT पूछताछ कर रही है।

ईडी को मनी लॉन्ड्रिंग के सुराग
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भी श्रीवास्तव से लगातार तीन दिन पूछताछ की है। शुरुआती जांच में मनी लॉन्ड्रिंग का क्लू मिला है, लेकिन फिलहाल ईडी ने उसे गिरफ्तार नहीं किया है। वहीं EOW ने आबकारी घोटाले में श्रीवास्तव और उसके बेटे कंचन श्रीवास्तव से पूछताछ कर उनका बयान दर्ज किया है।
दिल्ली के कारोबारी से लिए थे 15 करोड़, जान से मारने की धमकी दी
श्रीवास्तव ने अशोक रावत (रावत एसोसिएट्स, दिल्ली) से 15 करोड़ यह कहकर लिए कि वह उन्हें स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में ठेका दिलाएगा। ठेका न मिलने पर जब रावत ने पैसे मांगे, तो श्रीवास्तव ने 3.40 करोड़ रुपए लौटाए और बाकी रकम के लिए तीन चेक दिए, जो स्टॉप भुगतान के कारण बाउंस हो गए। विरोध पर उसने राजनीतिक और नक्सली रसूख का हवाला देते हुए कारोबारी को धमकाया, जिसके बाद तेलीबांधा थाना में एफआईआर दर्ज की गई थी।
साइबर फ्रॉड में रायपुर के 41 नंबरों का खुलासा, 18.52 लाख की ठगी
इधर, रायपुर के 41 मोबाइल नंबरों से देशभर में लोगों को कॉल कर 18.52 लाख रुपए से अधिक की ठगी का मामला भी सामने आया है। इन नंबरों के खिलाफ केंद्र सरकार के समन्वय पोर्टल पर दो दर्जन से अधिक शिकायतें दर्ज हैं। इसके बाद केंद्र से आई सूचना पर रायपुर पुलिस ने संबंधित नंबरधारकों पर केस दर्ज किया है।
SIM बेचने और म्यूल अकाउंट जैसी साजिश की आशंका
पुलिस को आशंका है कि इन सिम कार्ड्स को 10-15 हजार रुपए में बेचकर ठगी के नेटवर्क को बढ़ाया गया है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि सिम जिन लोगों के नाम पर हैं, क्या उन्हें इसकी जानकारी है या नहीं। साथ ही सिम कार्ड किस दस्तावेज़ पर लिए गए, क्या ये नंबर बैंक खातों से लिंक हैं और इनसे पैसे निकाले जा रहे हैं, इसकी जानकारी भी साइबर सेल द्वारा सभी टेलीकॉम कंपनियों से मांगी गई है।
