सुकमा में प्रेमा साईं जी महाराज का दिव्य दरबार, बस्तर में आध्यात्मिक उत्साह

सुकमा।
मां मातंगी दिव्य धाम पीठाधीश्वर डॉ. श्री प्रेमा साईं जी महाराज सुकमा पहुँच चुके हैं। मंगलवार, 10 फरवरी को आयोजित होने वाले एक दिवसीय भव्य दिव्य दरबार एवं सत्संग कार्यक्रम को लेकर पूरे बस्तर अंचल में गहरा उत्साह और आध्यात्मिक उमंग देखने को मिल रही है।

इस दिव्य दरबार में भाग लेने के लिए छत्तीसगढ़ सहित देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु सुकमा पहुँच रहे हैं। श्रद्धालु महाराज श्री से पर्चा बनवाने, दर्शन एवं आशीर्वाद प्राप्त करने को लेकर उत्साहित हैं। आयोजन को लेकर नगर एवं आसपास के क्षेत्रों में विशेष तैयारियाँ की गई हैं।

मां मातंगी दिव्य धाम को छत्तीसगढ़ का पहला त्रिकालदर्शी धाम माना जाता है, जिसने विश्व रिकॉर्ड स्थापित कर प्रदेश की आध्यात्मिक पहचान को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया है। यह धाम केवल आस्था का केंद्र ही नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति को सशक्त करने वाला एक सक्रिय आध्यात्मिक मंच बनकर उभरा है।

बस्तर अंचल में लगातार आयोजित हो रहे महाराज श्री के दिव्य दरबारों का सामाजिक प्रभाव भी स्पष्ट रूप से देखने को मिल रहा है। वे खुले मंच से धर्मांतरण के विरुद्ध जागरूकता फैलाने के साथ-साथ सनातन समाज को सांस्कृतिक और वैचारिक चुनौतियों के प्रति सचेत कर रहे हैं। इसी उद्देश्य से भव्य शोभायात्राओं और सत्संग कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है।

हाल ही में नक्सल-संवेदनशील क्षेत्रों बीजापुर और नारायणपुर में आयोजित कार्यक्रमों में 30 से 40 हजार से अधिक सनातनियों की उपस्थिति ने सामाजिक एकता और धार्मिक चेतना के नए जागरण को दर्शाया है। दूरस्थ अंचलों में रहने वाले लोगों में भी अपने धर्म, संस्कृति और परंपरा के प्रति आत्मगौरव की भावना सुदृढ़ हो रही है।

मंगलवार, 10 फरवरी को सुकमा की धरती पर सजने वाला यह दिव्य दरबार पूरे बस्तर के लिए एक ऐतिहासिक एवं प्रेरणादायी क्षण बनने जा रहा है। प्रेमा साईं जी महाराज द्वारा सनातन चेतना को जन-जन तक पहुँचाने का अभियान निरंतर गति पकड़ रहा है, जिससे बस्तर की सांस्कृतिक पहचान और अधिक सशक्त हो रही है।