मोजो मशरूम फैक्ट्री में बाल मजदूरी का खुलासा, FIR अब तक दर्ज नहीं: बाल आयोग और श्रम विभाग ने दस्तावेज नहीं दिए; जांच अटकी, बच्चों ने बताया—मारपीट होती थी
मोजो मशरूम फैक्ट्री में बाल मजदूरी के गंभीर आरोप सामने आने के बाद भी अब तक FIR दर्ज नहीं हो सकी है। मामले की जांच आधी पर अटकी हुई है क्योंकि बाल अधिकार आयोग और श्रम विभाग की ओर से आवश्यक दस्तावेज पुलिस को उपलब्ध नहीं कराए गए। इस देरी के कारण फैक्ट्री प्रबंधन के खिलाफ कार्रवाई आगे नहीं बढ़ पा रही है।
बच्चों ने लगाए मारपीट और जबरन काम कराने के आरोप
बचाए गए बच्चों ने पूछताछ में बताया कि फैक्ट्री में उनसे लंबे समय तक काम कराया जाता था। कई ने आरोप लगाया कि काम ठीक से न करने या देरी होने पर उनकी पिटाई की जाती थी। कुछ बच्चों ने यह भी कहा कि उन्हें उम्र छिपाकर काम पर लगाया गया और छुट्टी भी सीमित मिलती थी।
पुलिस जांच दस्तावेजों के अभाव में रुकी
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, बाल मजदूरी के मामलों में FIR दर्ज करने के लिए बाल आयोग और श्रम विभाग की रिपोर्ट, बयान और निरीक्षण से जुड़े दस्तावेज जरूरी होते हैं। लेकिन दोनों विभागों से रिकॉर्ड नहीं मिलने के कारण केस तकनीकी रूप से अधूरा है।
अधिकारियों ने कहा कि जब तक आधिकारिक प्रमाण नहीं मिलते, तब तक कानूनी प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ाई जा सकती।
विभागों की चुप्पी से सवाल
दस्तावेज न मिलने को लेकर संबंधित विभागों पर सवाल खड़े हो रहे हैं। बाल अधिकार संगठन और एक्टिविस्ट इसे गंभीर लापरवाही मान रहे हैं। उनका कहना है कि इतने संवेदनशील मामले में विभागों को तुरंत प्रतिक्रिया देनी चाहिए थी।
फैक्ट्री में निरीक्षण के बाद खुलासा
कुछ दिनों पहले फैक्ट्री में हुए निरीक्षण में कई नाबालिग बच्चों को काम करते पाया गया था। निरीक्षण टीम ने मौके से बच्चों को मुक्त कराया और जांच रिपोर्ट तैयार की। इसके बाद मामला सुर्खियों में आया।
आगे की कार्रवाई
पुलिस ने संबंधित विभागों से आवश्यक दस्तावेज जल्द उपलब्ध कराने की अपील की है। दस्तावेज मिलते ही FIR दर्ज कर फैक्ट्री मालिकों और प्रबंधकों पर कानूनी कार्रवाई शुरू की जाएगी। वहीं, बच्चों के काउंसलिंग और पुनर्वास की प्रक्रिया जारी है।
