“छत्तीसगढ़ का बेटा अब अंतरिक्ष की ओर – राजशेखर पैरी का नाम भारत के पहले निजी स्पेस मिशन में शामिल”

NASA को एक ईमेल से शुरू हुआ सपना, अब 2029 में अंतरिक्ष उड़ान की तैयारी

छत्तीसगढ़ के पेंड्रा से निकलकर राजशेखर पैरी अब अंतरिक्ष की यात्रा के करीब हैं। उन्हें अमेरिका की निजी एयरोस्पेस कंपनी Titans Space Industries ने अपने पहले मिशन के लिए भारतीय छात्र के रूप में चुना है। यह सफर एक साधारण मेल से शुरू हुआ, लेकिन आज वे एक अंतरिक्ष यात्री बनने की राह पर हैं।

🌠 कैसे मिला यह मौका?

राजशेखर ने 19 साल की उम्र में सिर्फ एक सवाल पूछने के लिए NASA को ईमेल किया था — “एस्ट्रोनॉट बनने की प्रक्रिया क्या है?” उम्मीदें कम थीं, लेकिन चार दिन बाद मिला जवाब उनके जीवन की दिशा बदल गया। NASA ने न केवल प्रक्रिया समझाई, बल्कि उन्हें इस दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित भी किया।

राजशेखर कहते हैं, “उस मेल ने मेरा आत्मविश्वास कई गुना बढ़ा दिया। तभी से ठान लिया था कि अब स्पेस में जाना ही है।”

🎓 शिक्षा और तैयारी

राजशेखर ने अपनी स्कूली पढ़ाई ऑक्सफोर्ड स्कूल से की और वर्तमान में वे एयरोस्पेस व मैकेनिकल इंजीनियरिंग के छात्र हैं। वे Orbitalocker में प्रोजेक्ट मैनेजर (इंजीनियरिंग) के पद पर कार्यरत हैं। इससे पहले उन्होंने Computational Fluid Dynamics में इंटर्नशिप भी की है।

वे डमी मून मिशन और एनालॉग स्पेस हैबिटेट में भी शामिल रहे हैं, जहाँ उन्होंने स्पेस में रहने, काम करने और परिस्थितियों से निपटने की व्यावहारिक ट्रेनिंग ली।

🛰️ स्पेस मिशन का प्लान

राजशेखर का पहला मिशन एक सब-ऑर्बिटल फ्लाइट है, जिसकी कुल अवधि करीब 5 घंटे होगी। यह मिशन रिसर्च ऑब्जर्वेशन पर केंद्रित रहेगा, जिसमें अंतरिक्ष में वैज्ञानिक परीक्षण किए जाएंगे। फिलहाल वे UK में चार साल की कड़ी ट्रेनिंग ले रहे हैं, और स्पेस जाने की संभावित तारीख 2029 की शुरुआत में तय हो सकती है।

🔬 R&D एस्ट्रोनॉट की भूमिका

राजशेखर इस मिशन में एक R&D Astronaut के तौर पर कार्य करेंगे। उनका काम होगा — अंतरिक्ष में किस तरह के प्रयोग संभव हैं, उन्हें प्लान करना, निष्पादित करना और भविष्य के लिए उन्हें डेवलप करना।

🧠 प्रेरणा और बचपन के सपने

राजशेखर बचपन से ही साइंस में रुचि रखते थे। 7वीं कक्षा से ही उन्हें फिजिक्स से लगाव था। 2008 में बिलासपुर में एक साइंस मॉडल प्रतियोगिता में दूसरा स्थान मिला — एक ऐसा पल जिसने आत्मविश्वास को नई उड़ान दी।

एक दिन उन्होंने अपने फिजिक्स टीचर से आसमान में चमकती रोशनी के बारे में पूछा, तो पता चला — “वो तारा नहीं, सैटेलाइट है।” वहीं से उनका लक्ष्य तय हो गया।

🧑‍🚀 ट्रेनिंग कैसी होती है?

स्पेस मिशन से पहले शारीरिक और मानसिक दोनों स्तर पर कठोर ट्रेनिंग दी जाती है। यह ट्रेनिंग दो चरणों में होती है:

  • फेज 1: साइकोलॉजिकल क्लासेस, टीमवर्क, स्ट्रेस मैनेजमेंट और फिजिकल फिटनेस

  • फेज 2 (2027 के बाद): एडवांस ऑपरेशनल ट्रेनिंग मॉड्यूल्स और परफॉर्मेंस असेसमेंट

✈️ क्या शुभांशु शुक्ला से प्रेरणा मिली?

राजशेखर बताते हैं कि उन्होंने ISS यात्री शुभांशु शुक्ला के वीडियो देखे हैं और उनसे प्रेरित होकर प्राइवेट पायलट लाइसेंस (PPL) लेने की योजना बनाई है। वे भविष्य में उनसे मिलकर पायलट बनने के टिप्स लेना चाहते हैं।

🎥 साइंस फिल्मों से मिली प्रेरणा

राजशेखर ने ‘Gravity’, ‘The Martian’, ‘Interstellar’ जैसी फिल्मों से काफी प्रेरणा ली है। वे मानते हैं कि ये फिल्में न केवल वैज्ञानिक दृष्टिकोण देती हैं बल्कि एक भावनात्मक जुड़ाव भी बनाती हैं। तेलुगू फिल्म ‘Antariksham’ और ‘Rocketry’ भी उनके लिए प्रेरणास्रोत रही हैं।

📢 युवाओं को संदेश

“अगर आपने तय कर लिया है कि आपको अंतरिक्ष में जाना है, तो फिर उसमें कोई विकल्प मत खोजिए। रास्ता सीधा रखिए, मन साफ रखिए, और ईमानदारी से मेहनत कीजिए – आप जरूर वहां पहुंचेंगे।”

राजशेखर छत्तीसगढ़ के युवाओं को यही संदेश देते हैं कि डर या टफनेस के नाम पर रास्ता न बदलें। साइंस, स्पेस या किसी भी क्षेत्र में सफलता डेडिकेशन, ईमानदारी और लगातार सीखने की इच्छा से मिलती है।