छत्तीसगढ़ में नक्सल मोर्चे पर बड़ी सफलता मिली है। ₹1.5 करोड़ के इनामी बताए जा रहे शीर्ष नक्सल नेता “देवजी” ने सुरक्षा बलों के सामने आत्मसमर्पण कर दिया है। अधिकारियों के अनुसार वह कई बड़े हमलों में शामिल रहा है और उस पर 100 से अधिक जवानों की हत्या से जुड़े मामलों में संलिप्तता के आरोप हैं।
राज्य पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में सरेंडर की पुष्टि की। अधिकारियों ने इसे नक्सल विरोधी अभियान में महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।
कौन है देवजी?
सुरक्षा सूत्रों के अनुसार देवजी संगठन में शीर्ष स्तर पर सक्रिय था और बस्तर क्षेत्र में कई वर्षों से प्रभावशाली भूमिका निभा रहा था।
उस पर:
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सुरक्षाबलों पर घात लगाकर हमले
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बारूदी सुरंग (IED) विस्फोट
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हथियारों की आपूर्ति और कैडर भर्ती
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रणनीतिक योजना बनाने
जैसे गंभीर आरोप दर्ज हैं।
हालांकि उसके खिलाफ दर्ज मामलों की आधिकारिक सूची न्यायिक प्रक्रिया के अंतर्गत है।
सरेंडर कैसे हुआ?
अधिकारियों के अनुसार, हाल के महीनों में चलाए गए लगातार ऑपरेशनों और पुनर्वास नीति के प्रभाव से देवजी ने आत्मसमर्पण का फैसला लिया।
सरेंडर कार्यक्रम के दौरान वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों और केंद्रीय बलों के प्रतिनिधि मौजूद रहे। देवजी ने हथियार भी सौंपे हैं, जिनकी फोरेंसिक जांच की जाएगी।
सरकार की पुनर्वास नीति
छत्तीसगढ़ सरकार की नक्सल पुनर्वास नीति के तहत आत्मसमर्पण करने वाले उग्रवादियों को:
जैसी सुविधाएं प्रदान की जाती हैं, बशर्ते वे कानून का पालन करें और जांच में सहयोग दें।
अधिकारियों का कहना है कि सरेंडर से अन्य नक्सल कैडरों को भी मुख्यधारा में लौटने का संदेश जाएगा।
सुरक्षा पर प्रभाव
विशेषज्ञों का मानना है कि इतने बड़े इनामी नेता का आत्मसमर्पण संगठन की संरचना पर असर डाल सकता है। बस्तर क्षेत्र में सक्रिय मॉड्यूल की कार्यप्रणाली और नेटवर्क से जुड़ी अहम जानकारी सुरक्षा एजेंसियों को मिल सकती है।
हालांकि यह भी माना जा रहा है कि संगठन की शेष इकाइयां प्रतिक्रिया स्वरूप गतिविधियां बढ़ा सकती हैं, इसलिए क्षेत्र में सुरक्षा और निगरानी बढ़ा दी गई है।
आगे की कानूनी प्रक्रिया
देवजी को न्यायालय में प्रस्तुत किया जाएगा। उसके खिलाफ दर्ज मामलों की जांच जारी रहेगी और कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
सुरक्षा एजेंसियों ने स्पष्ट किया है कि आत्मसमर्पण का अर्थ कानूनी प्रक्रिया से छूट नहीं है, बल्कि यह पुनर्वास और न्यायिक कार्रवाई दोनों के साथ आगे बढ़ेगा।
यह आत्मसमर्पण नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा अभियानों और पुनर्वास रणनीति के संयुक्त प्रभाव को दर्शाता है। आने वाले दिनों में इससे जुड़े और तथ्य सामने आने की संभावना है।