चार्टर्ड प्लेन ऑपरेटर्स पर सख्ती: विमान की उम्र और मेंटेनेंस हिस्ट्री बताना अनिवार्य, जिम्मेदारी केवल पायलट तक सीमित नहीं

नई दिल्ली से रिपोर्ट

देश में चार्टर्ड विमान सेवाओं को लेकर नियामक सख्ती बढ़ा दी गई है। नई गाइडलाइंस के तहत अब चार्टर्ड प्लेन ऑपरेटर्स को विमान की उम्र (Aircraft Age) और उसकी मेंटेनेंस हिस्ट्री (Maintenance Records) सार्वजनिक रूप से बताना अनिवार्य होगा।

इसके अलावा, किसी भी दुर्घटना या गंभीर तकनीकी चूक की स्थिति में जवाबदेही केवल पायलट तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि ऑपरेटर कंपनी और संबंधित तकनीकी स्टाफ भी जांच के दायरे में आएंगे।

क्या हैं नए नियम?

नए प्रावधानों के मुख्य बिंदु:

  • प्रत्येक चार्टर्ड विमान की निर्माण वर्ष और कुल उड़ान घंटे (Flight Hours) की जानकारी उपलब्ध कराना अनिवार्य।
  • नियमित सर्विसिंग, पार्ट्स रिप्लेसमेंट और तकनीकी निरीक्षण की रिपोर्ट सुरक्षित रखना और आवश्यकता पड़ने पर प्रस्तुत करना।
  • उड़ान से पहले अनिवार्य सेफ्टी चेक की डिजिटल रिकॉर्डिंग।
  • नियमों के उल्लंघन पर लाइसेंस निलंबन या भारी जुर्माना।

यह कदम यात्रियों की सुरक्षा और पारदर्शिता बढ़ाने के उद्देश्य से उठाया गया है।

जवाबदेही का दायरा बढ़ा

अब तक विमानन हादसों में अक्सर पायलट की भूमिका पर अधिक फोकस रहता था।

नए निर्देशों के अनुसार:

  1. ऑपरेटिंग कंपनी
  2. मेंटेनेंस इंजीनियर
  3. सेफ्टी ऑडिट टीम
  4. प्रबंधन स्तर के निर्णयकर्ता

— सभी की जिम्मेदारी तय की जाएगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि इससे “सिस्टमेटिक फेल्योर” की जांच अधिक व्यापक तरीके से संभव होगी।

सुरक्षा मानकों पर जोर

एविएशन विशेषज्ञों के अनुसार, चार्टर्ड सेवाओं में उपयोग होने वाले कई विमान अपेक्षाकृत पुराने होते हैं। ऐसे में:

  • एयरवर्थीनेस सर्टिफिकेट की सख्त जांच
  • स्पेयर पार्ट्स की गुणवत्ता
  • फ्लाइट डेटा मॉनिटरिंग

पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता होती है।

उद्योग पर संभावित असर

नई सख्ती से:

  • ऑपरेटर्स के संचालन खर्च बढ़ सकते हैं
  • छोटे ऑपरेटर्स पर अनुपालन का दबाव बढ़ेगा
  • यात्रियों का भरोसा मजबूत हो सकता है

लंबी अवधि में यह कदम चार्टर्ड एविएशन सेक्टर को अधिक सुरक्षित और पेशेवर बना सकता है।

निष्कर्ष

चार्टर्ड प्लेन ऑपरेटर्स के लिए नए नियम पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। विमान की उम्र और मेंटेनेंस रिकॉर्ड की अनिवार्य जानकारी तथा सामूहिक जिम्मेदारी तय करने से सुरक्षा मानकों में सुधार की उम्मीद है।

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