शीतकालीन सत्र में हंगामे के बीच कई अहम विधेयकों पर लगी मुहर
नई दिल्ली।
संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान भारी हंगामे, नारेबाजी और विपक्ष के वॉकआउट के बीच केंद्र सरकार ने अपने विधायी एजेंडा को आगे बढ़ाते हुए कई महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित करा लिया। सत्र के अधिकांश दिन व्यवधानों से प्रभावित रहे, लेकिन सरकार ने सदन की कार्यवाही जारी रखते हुए प्रमुख कानूनों पर निर्णय सुनिश्चित किया।
सत्र के दौरान विभिन्न मुद्दों को लेकर विपक्ष ने सरकार को घेरने की कोशिश की। कई बार तीखी बहस, स्थगन और विरोध प्रदर्शन देखने को मिले। विपक्ष का आरोप था कि सरकार बिना पर्याप्त चर्चा के विधेयकों को पारित करा रही है, वहीं सरकार का कहना रहा कि वह लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं का पालन करते हुए देशहित में आवश्यक कानूनों को आगे बढ़ा रही है।
हंगामे के बीच जिन विधेयकों को मंजूरी मिली, उनमें प्रशासनिक सुधार, आर्थिक प्रबंधन और सामाजिक कल्याण से जुड़े प्रस्ताव शामिल हैं। सरकार के अनुसार, ये विधेयक मौजूदा व्यवस्थाओं को अधिक प्रभावी बनाने और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप ढालने के लिए आवश्यक हैं।
सरकार पक्ष ने यह भी स्पष्ट किया कि बार-बार के व्यवधानों के बावजूद संसद की कार्यवाही को ठप नहीं होने दिया जा सकता। उनका कहना था कि जनता ने सरकार को निर्णय लेने का जनादेश दिया है और उसी जिम्मेदारी के तहत विधायी कार्य पूरे किए जा रहे हैं।
दूसरी ओर, विपक्षी दलों ने सत्र के संचालन पर सवाल उठाते हुए कहा कि संवाद और सहमति की परंपरा कमजोर हो रही है। विपक्ष का दावा है कि यदि सरकार गंभीर चर्चा के लिए तैयार होती, तो संसद अधिक सार्थक ढंग से चल सकती थी।
कुल मिलाकर, शीतकालीन सत्र राजनीतिक टकराव और विधायी गतिविधियों—दोनों का साक्षी बना। हंगामे के बीच पारित हुए विधेयकों ने जहां सरकार की रणनीतिक दृढ़ता को दर्शाया, वहीं संसद में बढ़ते गतिरोध पर भी नई बहस को जन्म दिया है।
