भूपेश सरकार के करीबी तांत्रिक KK का बड़ा खुलासा – ऑस्ट्रेलिया और चीन भेजे करोड़ों; चार्जशीट में 441 करोड़ के ट्रांजैक्शन, सट्टा कंपनी में बड़े निवेश का खुलासा

छत्तीसगढ़ की राजनीति और प्रशासनिक तंत्र को हिलाकर रख देने वाले तांत्रिक केके श्रीवास्तव मामले में लगातार नए खुलासे सामने आ रहे हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा दायर की गई विस्तृत चार्जशीट में कई ऐसे चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं, जो प्रदेश में पैसों के प्रवाह, सत्ता के गलियारों और मनी-लॉन्ड्रिंग के संगठित नेटवर्क की ओर इशारा करते हैं। चार्जशीट के अनुसार, केके श्रीवास्तव और उनके बेटे कंचन श्रीवास्तव ने वर्षों तक एक संगठित आर्थिक नेटवर्क चलाया, जिसके जरिए करोड़ों रुपये ऑस्ट्रेलिया और चीन भेजे गए।

ED की जांच रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि यह पैसा सिर्फ सामान्य बैंक ट्रांजैक्शन्स के जरिए नहीं भेजा गया, बल्कि इसे कई लेयर में छिपाकर भेजा गया ताकि स्रोत का पता लगाना मुश्किल हो। जांच में पता चला है कि तांत्रिक केके के पास 441 करोड़ रुपये तक के संदिग्ध लेन-देन का रिकॉर्ड मौजूद है। यह लेन-देन विभिन्न शेल कंपनियों, फर्जी खातों और डिजिटल वॉलेट के जरिए किए गए थे।

सट्टा एप कंपनी में बड़ा निवेश – मनी लॉन्ड्रिंग के मजबूत संकेत

चार्जशीट में ED ने विशेष रूप से उल्लेख किया है कि करोड़ों रुपये का एक बड़ा हिस्सा भारत में चल रही एक अवैध सट्टा एप कंपनी में लगाया गया था। यह वही नेटवर्क है जो पिछले कुछ वर्षों में राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में रहा और जिसकी वजह से कई राज्यों में छापेमारी की गई।

जांच एजेंसी का मानना है कि केके श्रीवास्तव और उनका बेटा इस सट्टा नेटवर्क के भीतर एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते थे। वे न केवल निवेशक थे बल्कि इस नेटवर्क को कालेधन को सफेद करने में सुविधा भी प्रदान करते थे। कई संदिग्ध डिजिटल वॉलेट, विदेशी करेंसी के लेन-देन और क्रिप्टो ट्रांजैक्शन इसके सबूत के रूप में ED के हाथ लगे हैं।

ऑस्ट्रेलिया और चीन तक पहुंचा पैसों का नेटवर्क

चार्जशीट में कई विदेश-आधारित खातों की जानकारी दी गई है जिनमें भारत से करोड़ों रुपये भेजे गए। यहां सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर इन पैसों को विदेश क्यों भेजा गया? नई रिपोर्ट्स के अनुसार:

  • कुछ ट्रांजैक्शन्स बिजनेस निवेश के नाम पर भेजे गए

  • कई रकम शेल कंपनियों में ट्रांसफर की गईं

  • डिजिटल वॉलेट्स के जरिए ऐसा नेटवर्क बनाया गया था जिसमें असली भेजने वाला और प्राप्तकर्ता का पता लगाना मुश्किल था

  • चीन और ऑस्ट्रेलिया में स्थित कंपनियों से केके का सीधा या अप्रत्यक्ष संबंध होने के संकेत मिले हैं

जांच एजेंसियों का अनुमान है कि यह रकम वैध बिजनेस के लिए नहीं भेजी गई थी। यह पैसा या तो विदेशों में जमा किया गया ताकि कार्रवाई से बचा जा सके या फिर सट्टा और अन्य अवैध गतिविधियों को बढ़ाने के लिए उपयोग हुआ।

राजनीतिक गलियारों में खलबली – बड़े नेताओं तक पहुंच?

केके श्रीवास्तव को अक्सर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का करीबी माना जाता रहा है। चुनावी राजनीति में वे हमेशा सुर्खियों में रहे। ऐसे में ED द्वारा किए गए इस बड़े खुलासे ने प्रदेश की राजनीति में तूफान ला दिया है।
हालांकि, अभी तक चार्जशीट में सीधे किसी बड़े राजनीतिक नेता का नाम शामिल नहीं किया गया है, लेकिन जांच एजेंसी इस बात की पड़ताल कर रही है कि क्या इस पूरे फाइनेंशियल नेटवर्क का राजनीतिक संरक्षण मिला था।

कुछ वरिष्ठ अधिकारियों ने माना है कि यदि 441 करोड़ रुपये का लेन-देन इतने लंबे समय से चल रहा था, तो बिना राजनीतिक और प्रशासनिक सुरक्षा के यह संभव नहीं था।

कैसे चला रहा था नेटवर्क? – ED की विस्तृत जांच

ED के अधिकारियों ने इस केस में कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर जांच की है। इनमें प्रमुख हैं:

1. नकली कंपनियों का इस्तेमाल

केके और उसके बेटे ने कई फर्जी कंपनियां बनाई थीं, जो सिर्फ कागज़ों पर मौजूद थीं। इन्हीं कंपनियों का उपयोग पैसा इधर-उधर करने के लिए किया जाता था।

2. डिजिटल प्लेटफॉर्म का दुरुपयोग

UPI, डिजिटल वॉलेट, ऑनलाइन पेमेंट और क्रिप्टो—इन सभी का जमकर उपयोग हुआ। कई लेन-देन इतने छोटे-छोटे हिस्सों में किए गए कि पहली नजर में वे सामान्य दिखते थे।

3. फर्जी कर्मचारियों की एंट्री

कुछ कंपनियों के नाम पर नकली कर्मचारियों के अकाउंट खोले गए और वहां से लाखों-करोड़ों रुपये गुजारे गए।

4. विदेशी कंपनियों से ‘सर्विस एग्रीमेंट’

कुछ कंपनियों के नाम पर विदेशों से सर्विस एग्रीमेंट दिखाया गया ताकि पैसे का अंतरराष्ट्रीय ट्रांसफर वैध लगे।

आखिर इतनी बड़ी रकम आई कहां से?

ED की अब तक की जांच में तीन प्रमुख सोर्स सामने आए हैं:

1. सट्टा और बेटिंग एप्स

यह सबसे बड़ा स्रोत माना गया है। छापेमारी में कई डिजिटल रिकॉर्ड मिले हैं जो सट्टा एप कंपनी से लिंक हैं।

2. काले धन का लेयरिंग मॉडल

तांत्रिक केके को कई उद्योगपतियों, कारोबारियों और नेताओं के पास पहुंच हासिल थी। कई लोगों का मानना है कि वे कालेधन को वैध बनाने के लिए ‘मध्यस्थ’ की भूमिका निभाते थे।

3. नकद वसूली का नेटवर्क

कुछ स्थानीय रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि केके के पास वसूली का अपना नेटवर्क था। हालांकि इसकी पुष्टि अभी जांच में होना बाकी है।

परिवार और करीबी लोगों से भी पूछताछ जारी

ED ने केके श्रीवास्तव ही नहीं, बल्कि उनके बेटे, रिश्तेदारों और उनके बिजनेस पार्टनर्स से भी पूछताछ की है। एजेंसी ने कई मोबाइल फोन, लैपटॉप, हार्ड डिस्क और डिजिटल रिकॉर्ड जब्त किए हैं। इनमें से कई डिवाइस की फॉरेंसिक जांच जारी है।

राज्य की कानून-व्यवस्था और राजनीति पर असर

यह केस सिर्फ एक वित्तीय घोटाला नहीं, बल्कि एक ऐसा नेटवर्क है जिसने छत्तीसगढ़ की राजनीति, प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि ED की रिपोर्ट आने के बाद:

  • कई बड़ी गिरफ्तारियाँ संभव

  • राजनीतिक बयानबाज़ी तेज

  • केंद्र और राज्य एजेंसियां आमने-सामने

  • और कई बड़े नाम सामने आने की संभावना है

ED अभी किस दिशा में जांच आगे बढ़ा रही है?

अगले चरण में एजेंसी इन बिंदुओं की जांच कर रही है:

  • विदेश भेजे गए पैसों का असली उपयोग

  • सट्टा एप कंपनी के निदेशकों और केके के बीच संबंध

  • राजनीतिक स्तर पर संरक्षण मिला या नहीं

  • 441 करोड़ के ट्रांजैक्शन में शामिल अन्य व्यक्ति

  • क्या यह नेटवर्क राष्ट्रीय स्तर पर फैला था?

निष्कर्ष

केके श्रीवास्तव पर की जा रही ED की कार्रवाई सिर्फ एक व्यक्ति की वित्तीय गड़बड़ियों का मामला नहीं, बल्कि प्रदेश में चल रहे एक विशाल और जटिल आर्थिक जाल का प्रतीक है।
चार्जशीट में सामने आए तथ्यों ने साफ कर दिया है कि यह नेटवर्क वर्षों से सक्रिय था और इसमें बड़े वित्तीय लेन-देन किए जाते थे।

जांच आगे बढ़ने के साथ-साथ और भी बड़े नामों के सामने आने की संभावना है, जिससे आने वाले राजनीतिक माहौल पर बड़ा असर पड़ेगा।