रायपुर नगर निगम ज़ोन–3 की बैठक पर विवाद, पार्षद को किनारे कर पति ने ले ली ज़ोन अधिकारियों की पूरी क्लास , भड़के नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी हुए भाजपा पर हमलावर

रायपुर।

नगर निगम रायपुर के ज़ोन क्रमांक–3 में जल संकट को लेकर बुलाई गई बैठक उस समय विवादों में आ गई, जब बैठक की अध्यक्षता को लेकर सवाल खड़े हो गए। आरोप है कि ज़ोन अध्यक्ष साधना साहू की मौजूदगी के बावजूद बैठक में उनके पति एवं पूर्व पार्षद प्रमोद साहू निर्णय लेते और अधिकारियों को निर्देश देते नज़र आए। नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी ने इसे गंभीरता से लेते हुए बीजेपी पर सवाल दागा है कि क्या सत्ता मोह मे लिप्त भाजपा को जनता द्वारा निर्वाचित अपनी ही पार्टी की महिला पार्षद पर भरोसा नहीं है जो भरी बैठक मे एक महिला पार्षद को दरकिनार कर खुद बैठक लेने पति सामने आने लगे हैं।

 

बैठक में जल समस्या जैसे गंभीर मुद्दे पर चर्चा हो रही थी, लेकिन ज़ोन से मिली सूचना के अनुसार किसी पद पर न होने के बावजूद प्रमोद साहू की भूमिका प्रमुख दिखाई दी। बताया जा रहा है कि ज़ोन–3 क्षेत्र में कई स्थानों पर पूर्व पार्षद प्रमोद साहू के नाम के बोर्ड भी लगे हुए हैं, जिससे “पद पत्नी के पास, लेकिन प्रभाव पति का” जैसी स्थिति बनने की बात कही जा रही है।

नगर निगम के नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी ने इस मामले को गंभीर बताते हुए कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में केवल निर्वाचित प्रतिनिधि को ही निर्णय लेने का अधिकार है। उन्होंने इसे महिलाओं के अधिकारों के हनन से जोड़ते हुए सवाल उठाया कि जब महिला सशक्तिकरण की बात की जाती है, तब इस प्रकार की व्यवस्थाएं किस संदेश को दर्शाती हैं। तिवारी ने आरोप लगाया कि ज़ोन–3 में लोकतांत्रिक प्रक्रिया के बजाय व्यक्तिगत प्रभाव हावी होता दिख रहा है।उन्होंने तंज़ कसा कि क्या भाजपा नई परिपाटी ला रही कि निगम अधिकारी , कर्मचारी के अवकाश पर होने पर उनके परिवार जन भी उनकी जगह ड्यूटी मे आ सकेंगे ।

उल्लेखनीय है कि प्रमोद साहू पूर्व में पार्षद और ज़ोन अध्यक्ष रह चुके हैं, लेकिन वर्तमान में उनके पास कोई आधिकारिक पद नहीं है। ऐसे में बैठक में उनकी सक्रिय भूमिका को लेकर प्रशासनिक मर्यादाओं और संवैधानिक प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं। विपक्ष ने पूरे मामले को “पर्दे के पीछे की सत्ता” बताते हुए निगम प्रशासन से स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की है।
फिलहाल निगम प्रशासन की ओर से इस विषय पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन राजनीतिक हलकों में यह मुद्दा चर्चा का केंद्र बना हुआ है।