रायपुर : बस्तर के लालबाग में वनोपज से सजी 20,700 वर्गफीट की भव्य रंगोली ने रचा विश्व रिकॉर्ड, राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने किया अवलोकन

धरती बनी कैनवास, वनोपज बने रंग और उकेर दी रंगोली, वर्ल्ड रिकॉर्ड दर्ज

राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु के समक्ष प्रदर्शित हुई बस्तर की समृद्ध विरासत

गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड ने किया प्रमाणित

रायपुर, 24 अक्टूबर 2026:

बस्तर जिले के जिला मुख्यालय जगदलपुर का लालबाग मैदान शुक्रवार की सुबह एक अलग ही रंग में रंगा नजर आया। यहाँ मैदान का एक बड़ा हिस्सा कैनवास बन चुका था और उसमें वनोपज व अनाज रंग का काम कर रहे थे। राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु के बस्तर दशहरा के मौके पर बस्तर आगमन पर यह अनोखी और अद्वितीय कलाकृति वन विभाग की ओर से तैयार कराई गई थी। 15 से अधिक वनोपज व अनाज का इस्तेमाल करते हुए 20,700 वर्गफीट क्षेत्रफल में सुंदर आकृतियां उकेरी गई थीं। इसका अवलोकन राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु, राज्यपाल श्री रमेन डेका, मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय एवं अन्य अतिथियों ने किया। वनोपज से बनी इस रंगोली की विशिष्टता को देखते हुए गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड की ओर से इसे प्रमाणित भी किया गया।

बस्तर दशहरा और ऐतिहासिक राष्ट्रपति प्रवास

गौरतलब है कि बस्तर दशहरा के दौरान पहली बार देश के प्रथम नागरिक का आगमन माई दंतेश्वरी की धरा पर हुआ। दो दिवसीय प्रवास पर छत्तीसगढ़ पहुँचीं राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु का 23 अक्टूबर को जगदलपुर आगमन हुआ। यहाँ माई दंतेश्वरी से आशीर्वाद लेने के बाद वे मुरिया दरबार में शामिल हुईं, फिर लालबाग मैदान में सभा को संबोधित करने पहुँचीं।

उनके इस प्रवास को लेकर बस्तर में भारी उत्साह देखा गया। इसी बीच वन विभाग ने नक्सलवाद के खात्मे के बाद बदलते बस्तर की तस्वीर को रंगोली के माध्यम से राष्ट्रपति के समक्ष प्रस्तुत किया। बस्तर की समृद्ध जनजातीय विरासत, विशिष्ट सांस्कृतिक परंपराओं, प्राकृतिक संपदा तथा क्षेत्र की विकास यात्रा को इस रंगोली के जरिए बेहद खूबसूरती से दर्शाया गया।

वनोपज और आजीविका का अनूठा संगम

इस रंगोली की सबसे बड़ी खासियत बस्तर के वनवासियों द्वारा एकत्र किए गए वनोपज रहे, जिनका इस्तेमाल रंगों के रूप में किया गया था। इस कलात्मक अभिव्यक्ति में बस्तर के वन, वनवासी जीवन, जनजातीय संस्कृति तथा माननीय राष्ट्रपति जी के सम्मानित स्वरूप को उकेरा गया है।

यह विशाल रंगोली बस्तर की प्राकृतिक संपदा, स्थानीय समुदायों की सृजनशीलता और परंपरागत ज्ञान का प्रतीक है। वनोपज बस्तर के जनजातीय एवं वनवासी समुदायों की आजीविका, आर्थिक आत्मनिर्भरता और सांस्कृतिक पहचान से गहराई से जुड़ी हुई है। इसके माध्यम से क्षेत्र के समावेशी विकास की संभावनाओं को भी रेखांकित किया गया।

इस अवसर पर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री केदार कश्यप, संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल, सांसद श्री महेश कश्यप, जगदलपुर विधायक श्री किरण सिंह देव सहित अन्य जनप्रतिनिधिगण एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।