नारायणपुर, फरवरी 2026।
छत्तीसगढ़ के नारायणपुर और सक्ती जिलों के सरकारी स्कूलों में किशोरियों के लिए स्वच्छ और सुरक्षित मैन्स्ट्रूअल हाइजीन सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की गई है। भारत की अग्रणी टेलीकॉम इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी Indus Towers ने अपनी CSR पहल के तहत PINKASHA Foundation के सहयोग से “नारी सम्मान प्रोग्राम” संचालित किया।
इस पहल के अंतर्गत कुल 65 सरकारी स्कूलों (नारायणपुर में 20 और सक्ती में 45) में सैनिटरी पैड वेंडिंग मशीनें एवं पैड बैंक (स्टोरेज कबर्ड) स्थापित किए गए। केवल नारायणपुर जिले में ही 20 डस्टबिन और 20 पैड बैंक इंस्टॉल किए गए।
कार्यक्रम के दौरान नारायणपुर में 3,383 से अधिक छात्राओं को 6,766 पैड पैकेट वितरित किए गए, जबकि कुल मिलाकर 64,618 पैड की आपूर्ति सुनिश्चित की गई।
जागरूकता और प्रशिक्षण पर विशेष जोर
इन्फ्रास्ट्रक्चर स्थापना के साथ-साथ व्यापक जागरूकता अभियान भी चलाया गया।
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40 स्कूलों में जागरूकता सत्र
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62 सामुदायिक सत्र
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40 स्कूल सखियों का प्रशिक्षण
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20 अध्यापकों को विशेष प्रशिक्षण
इस पहल का उद्देश्य केवल उत्पाद उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि स्कूलों में लिंग-संवेदनशील वातावरण विकसित करना और किशोरियों को आत्मविश्वास के साथ अपनी माहवारी प्रबंधन में सक्षम बनाना है।
जिला अधिकारी ने कार्यक्रम की सराहना करते हुए कहा कि आपसी सहयोग से किए गए ये प्रयास छात्राओं के स्वास्थ्य, सम्मान और शैक्षणिक निरंतरता सुनिश्चित करने की दिशा में अहम कदम हैं।
शिक्षा में बाधा न बने स्वास्थ्य
नारी सम्मान प्रोग्राम, Indus Towers की प्रमुख CSR पहल ‘प्रगति’ के अंतर्गत संचालित है। इसका उद्देश्य है कि मैन्स्ट्रूअल हेल्थ के कारण किसी भी छात्रा की पढ़ाई प्रभावित न हो।
कंपनी के सीईओ Tejinder Kalra ने कहा:
“हर लड़की के लिए मैन्स्ट्रूअल हाइजीन प्रोडक्ट्स की सुलभता केवल स्वास्थ्य का प्रश्न नहीं, बल्कि गरिमा, आत्मविश्वास और समान अवसर का विषय है। नारी सम्मान प्रोग्राम का यह चरण हजारों किशोरियों के लिए नई संभावनाएं खोलता है।”
वहीं PINKASHA Foundation के मैनेजिंग ट्रस्टी एवं प्रेसीडेंट Arun Gupta ने कहा कि यह उपलब्धि सामूहिक प्रयासों की शक्ति को दर्शाती है और अध्यापकों व समुदाय की भागीदारी इस बदलाव को स्थायी बनाएगी।
समावेशी भविष्य की ओर कदम
छत्तीसगढ़ के स्कूलों में मैन्स्ट्रूअल हाइजीन इंफ्रास्ट्रक्चर का यह रोलआउट किशोरियों के लिए गरिमापूर्ण और आत्मविश्वासपूर्ण वातावरण तैयार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
इस कार्यक्रम का मूल उद्देश्य स्पष्ट है —
“किशोरियां गरिमा के साथ अपनी माहवारी का प्रबंधन कर सकें और उनकी शिक्षा किसी भी परिस्थिति में बाधित न हो।”