समिट के दौरान प्रदर्शित चार पैरों वाला एआई-संचालित रोबोटिक डॉग आकर्षण का केंद्र बना। हालांकि, बाद में सोशल मीडिया और तकनीकी विशेषज्ञों के बीच यह दावा किया गया कि यह डिवाइस चीनी कंपनी की तकनीक से मेल खाता है। आरोप यह भी लगे कि इसे स्वदेशी नवाचार के रूप में प्रस्तुत किया गया, जिससे पारदर्शिता पर सवाल उठे।
विवाद बढ़ने पर सरकार ने मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित यूनिवर्सिटी को एआई समिट से बाहर करने का निर्णय लिया। अधिकारियों का कहना है कि राष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत की जाने वाली तकनीक के संबंध में तथ्यात्मक स्पष्टता और प्रामाणिकता अनिवार्य है।
समिट में अव्यवस्था की शिकायतें
समिट के दौरान आयोजन प्रबंधन को लेकर भी कई प्रतिभागियों और स्टार्टअप प्रतिनिधियों ने अव्यवस्था की शिकायतें दर्ज कराई। तकनीकी सत्रों में समय प्रबंधन, पंजीकरण प्रक्रिया और डेमो स्पेस के समन्वय को लेकर सवाल उठे।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, भविष्य में ऐसे आयोजनों के लिए अधिक कठोर सत्यापन और समन्वय तंत्र लागू किया जाएगा, ताकि भारत की तकनीकी छवि पर कोई प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।
2047 तक AI सुपरपावर बनने का लक्ष्य
विवाद के बावजूद समिट में 2047 तक भारत को वैश्विक एआई सुपरपावर बनाने के लक्ष्य को दोहराया गया। वक्ताओं ने कहा कि अनुसंधान, स्टार्टअप इकोसिस्टम, स्किल डेवलपमेंट और स्वदेशी तकनीक के विकास पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत के पास डेटा, युवा प्रतिभा और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर का मजबूत आधार है, लेकिन वैश्विक प्रतिस्पर्धा में आगे बढ़ने के लिए पारदर्शिता, नवाचार की मौलिकता और विश्वसनीयता अत्यंत आवश्यक होगी।
एआई समिट से जुड़े इस विवाद ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि तकनीकी आत्मनिर्भरता के दावे के साथ-साथ सत्यापन और नैतिक मानकों का पालन भी उतना ही महत्वपूर्ण है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार और शैक्षणिक संस्थान इस घटना से क्या सबक लेते हैं।