रायपुर।
प्रदेश के 500 से अधिक सरकारी हेल्थ सेंटरों में ब्लड टेस्ट की सुविधा प्रभावित होने की खबर सामने आई है। रीएजेंट (रसायन) की कमी और कई स्थानों पर मशीनों के खराब होने के कारण जांच कार्य ठप पड़ा है। इससे बड़ी संख्या में मरीजों को निजी लैब का सहारा लेना पड़ रहा है।
रीएजेंट की कमी और मशीन खराबी
ब्लड शुगर, हीमोग्लोबिन, मलेरिया, डेंगू और अन्य सामान्य जांचें प्रभावित बताई जा रही हैं। ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में स्थिति अधिक गंभीर है, जहां निजी लैब की उपलब्धता सीमित है।
मरीजों पर बढ़ता आर्थिक बोझ
सरकारी अस्पतालों में जांच सुविधा बंद होने से मरीजों को निजी लैब में परीक्षण कराना पड़ रहा है। इससे अतिरिक्त आर्थिक भार बढ़ गया है, खासकर निम्न आय वर्ग के लोगों पर।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में जांच सुविधा बंद होना सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली के लिए गंभीर संकेत है। नियमित जांच न होने से बीमारियों का समय पर निदान प्रभावित हो सकता है।
स्वास्थ्य विभाग का आश्वासन
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने कहा है कि रीएजेंट की आपूर्ति की प्रक्रिया जारी है और जल्द ही सभी केंद्रों में जांच सेवाएं बहाल कर दी जाएंगी। जिन केंद्रों में मशीनें खराब हैं, वहां तकनीकी टीम भेजी जा रही है।
अधिकारियों के अनुसार, आपूर्ति श्रृंखला में आई अस्थायी बाधा के कारण यह स्थिति बनी है और इसे प्राथमिकता के आधार पर ठीक किया जाएगा।
संभावित प्रभाव और समाधान
विशेषज्ञों का सुझाव है कि:
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रीएजेंट की आपूर्ति के लिए बेहतर स्टॉक प्रबंधन प्रणाली विकसित की जाए।
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मशीनों के नियमित रखरखाव (मेंटेनेंस) की व्यवस्था हो।
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जिला स्तर पर बैकअप लैब सुविधा सुनिश्चित की जाए।
यदि समय रहते सुधार नहीं हुआ, तो संक्रमण और मौसमी बीमारियों के मामलों में वृद्धि के बीच स्वास्थ्य सेवाओं पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।
निष्कर्ष
प्रदेश के 500 से अधिक हेल्थ सेंटरों में ब्लड टेस्ट बंद होना सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए चुनौती है। मरीजों को निजी लैब की ओर रुख करना पड़ रहा है, जिससे आर्थिक और स्वास्थ्य संबंधी जोखिम बढ़ रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग के आश्वासन के बाद अब जल्द समाधान की उम्मीद की जा रही है।