संसदीय पैनल ने बांग्लादेश में चीनी प्रभाव और चरमपंथी गतिविधियों को बताया भारत की सुरक्षा के लिए चुनौती
नई दिल्ली — भारत–बांग्लादेश संबंधों को लेकर एक बार फिर गंभीर चिंताएं सामने आई हैं। एक संसदीय पैनल ने अपनी रिपोर्ट में बांग्लादेश में बढ़ते चीनी प्रभाव और चरमपंथी गतिविधियों को भारत की सुरक्षा के लिए उभरती हुई चुनौती बताया है। पैनल के अनुसार, क्षेत्रीय भू-राजनीतिक संतुलन में हो रहे बदलावों पर सतर्क नजर रखना आवश्यक हो गया है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि बांग्लादेश में चीन की आर्थिक, रणनीतिक और अवसंरचनात्मक मौजूदगी लगातार बढ़ रही है। बड़े पैमाने पर निवेश, विकास परियोजनाएं और रक्षा सहयोग ऐसे कारक हैं, जो दीर्घकाल में क्षेत्रीय सुरक्षा समीकरणों को प्रभावित कर सकते हैं। पैनल ने इन गतिविधियों के रणनीतिक असर का गहन आकलन करने की आवश्यकता पर जोर दिया है।
इसके साथ ही, पैनल ने बांग्लादेश के कुछ हिस्सों में चरमपंथी संगठनों की सक्रियता को भी गंभीर मुद्दा बताया। रिपोर्ट के अनुसार, ऐसी गतिविधियों के सीमा-पार प्रभाव हो सकते हैं, जिनमें कट्टरपंथ, अवैध गतिविधियां और सीमा सुरक्षा से जुड़े खतरे शामिल हैं। पैनल ने चेताया कि पड़ोसी देशों में अस्थिरता सीधे तौर पर भारत की आंतरिक सुरक्षा को प्रभावित कर सकती है।
भारत और बांग्लादेश के बीच ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आर्थिक संबंध मजबूत रहे हैं। दोनों देशों ने अब तक आतंकवाद और सीमा प्रबंधन के मुद्दों पर सहयोग भी किया है। हालांकि, रिपोर्ट में कहा गया है कि बदलते क्षेत्रीय हालात, खासकर चीन की बढ़ती भूमिका के चलते भारत को अधिक सतर्क और सक्रिय कूटनीतिक रणनीति अपनाने की जरूरत है।
संसदीय पैनल ने सिफारिश की है कि भारत को बांग्लादेश के साथ संवाद और सहयोग को और मजबूत करना चाहिए, खुफिया सूचनाओं के आदान-प्रदान को बढ़ाना चाहिए और सुरक्षा एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित करना चाहिए। इसके साथ ही, क्षेत्र में अपनी विकास और संपर्क परियोजनाओं को भी गति देने पर जोर दिया गया है।
कुल मिलाकर, यह रिपोर्ट भारत–बांग्लादेश संबंधों को नए सिरे से देखने की जरूरत को रेखांकित करती है, जहां मजबूत द्विपक्षीय रिश्तों के साथ-साथ क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों का संतुलित तरीके से सामना करना जरूरी माना जा रहा है।